पावरकॉम प्रतिवर्ष झेल रहा करोड़ो का नुक्सान, इन क्षेत्रों से हो रहा सबसे अधिक लॉस

Edited By Kalash,Updated: 21 May, 2022 12:10 PM

powercom loss in border area

पावरकॉम बिजली चोरी व लॉस को रोकने में कामयाब हो जाए तो प्रतिवर्ष होने वाले 1100 करोड़ के नुक्सान से बचा जा सकता है

जालंधर (ब्यूरो): पावरकॉम बिजली चोरी व लॉस को रोकने में कामयाब हो जाए तो प्रतिवर्ष होने वाले 1100 करोड़ के नुक्सान से बचा जा सकता है। इसके लिए विभाग को सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीण व घरेलू कैटेगरी पर फोकस करना होगा क्योंकि सबसे अधिक बिजली चोरी व लॉस मुख्य रूप से पंजाब के बार्डर एरिया में हो रहे हैं। इसका खुलासा बीते वित्तीय वर्ष की पावरकॉम से संबंधित एक रिपोर्ट से हुआ है। बार्डर जोन के कई सर्कलों की डिवीजनों में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां 50 प्रतिशत से अधिक के लॉस हैं।

रिपोर्ट के एग्रीकल्चर सप्लाई, यूनिट बिल व वितरण हानि संबंधी बनाए गए चार्ट के मुताबिक पंजाब में बीते वर्ष फीडरों के जरिए 5,61,791.16 लाख यूनिट बिजली भेजी गई, इसमें से 4,92,518.67 लाख यूनिट का बिल बन पाया जबकि 12.33 प्रतिशत बिजली का नुक्सान विभाग को उठाना पड़ा।

आसान शब्दों में कहा जाए तो विभाग द्वारा भेजी गई बिजली में से 69,272.49 लाख यूनिट (12.33 प्रतिशत) बिजली की चोरी हुई, जिसका बिल ही नहीं बन सका। इसके मुताबिक विभाग को 460 करोड़ का नुक्सान ग्रामीण इलाकों जबकि 630 करोड़ का नुक्सान घरेलू सप्लाई के रूप में उठाना पड़ा जोकि 1090 करोड़ के करीब बनता है।

रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में सबसे अधिक डिस्ट्रीब्यूशन पॉवर लॉस बार्डर जोन अमृतसर के इलाके में हुए। कुल भेजी गई बिजली का 21.98 प्रतिशत लॉस में गया। इसी तरह से पंजाब में लॉस के मामले में दूसरा नंबर बार्डर जोन बठिंडा का आता है, जहां पर 17.84 प्रतिशत के लॉस रिपोर्ट किए गए। तीसरे स्थान पर पावरकॉम हैड ऑफिस पटियाला जोन का नंबर रिपोर्ट हुआ है जिसमें 10.82 प्रतिशत का नुक्सान झेलना पड़ा। सैंट्रल जोन लुधियाना में यह लॉस सबसे कम 4.63 प्रतिशत रहे जबकि नॉर्थ जोन जालंधर के लॉस 9.90 प्रतिशत दर्ज किए गए।  

यह आंकड़े बताते है कि विभाग को सीमावर्ती इलाकों पर फोकस करके बड़े नुक्सान से राहत मिल सकती है। विभाग की कई डिवीजनों में लॉस हर वर्ष बढ़ रहे हैं जोकि चिंता का विषय भी है। कई डिवीजनें ऐसी हैं जहां सीधी कुंडियां लगी होने के बावजूद विभागीय कर्मचारी कार्रवाई करने से डरते हैं, क्योंकि बिजली चोरी पकड़ने गए फील्ड स्टाफ को कई बार मारपीट का शिकार होना पड़ा है। ऐसे हालात में बिजली चोरी रोकने में सरकार की मदद अहम भूमिका अदा करेगी। 

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