Students को झटका, CBSE बोर्ड ने बदल दिए नियम

Edited By Kamini,Updated: 19 Sep, 2025 12:15 PM

cbse board changed the rules

CBSE के छात्रों के लिए बेहद ही खास खबर सामने आई है।

पंजाब डेस्क : CBSE के छात्रों के लिए बेहद ही खास खबर सामने आई है। दरअसल, CBSE ने बड़ा फैसला लेते हुए एडिशनल सब्जैक्ट लेने की ऑप्शन को खत्म कर दिया है। CBSE बोर्ड द्वारा बदले नियमों से छात्रों को करारा झटका लगा है।

प्राइवेट बच्चों को इंटरनल असैस्मैंट देना संभव नही

CBSE ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे हजारों छात्रों की प्लानिंग पर असर पड़ सकता है। अब तक प्राइवेट कैंडिडेट्स के पास क्लास 10वीं और 12वीं में एडिशनल सब्जेक्ट लेने का ऑप्शन था, यानी 12वीं पास करने के बाद छात्र अगले 2 सालों तक कोई नया विषय चुनकर उसका एग्जाम दे सकते थे। कई बच्चों ने इसका इस्तेमाल कर अपने करियर की दिशा बदली। जैसे, बायोलॉजी पढ़ने वाला छात्र बाद में मैथ्स लेकर JEE की तैयारी कर लेता था लेकिन अब 2026 से ये रास्ता बंद हो जाएगा। बोर्ड का कहना है कि प्राइवेट बच्चों को इंटरनल असैस्मेंट देना संभव नहीं है।

CBSE ने क्यों लिया ये फैसला ?

CBSE के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्राइवेट कैंडिडेट्स को एडिशनल सब्जेक्ट में इंटरनल असैस्मेंट के नंबर देना मुश्किल होता है। बोर्ड का फोकस केवल परीक्षा कराने पर नहीं, बल्कि स्कूलिंग के पूरे अनुभव पर है। इसी वजह से 2026 से इस विकल्प को हटा दिया गया है। वहीं छात्रों के मुताबिक, बोर्ड को ये फैसला अचानक लागू करने के बजाय पहले से जानकारी देनी चाहिए थी।

कितने छात्रों ने चुना था ये ऑप्शन ?

CBSE के आंकड़ों के मुताबिक 2025 की परीक्षा में 2768 छात्रों ने अतिरिक्त विषय के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 2161 स्टूडेंट्स (78%) परीक्षा में बैठे थे। वहीं 2024 में ये संख्या थोड़ी कम रही। उस साल 2225 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया था और 1657 (74%) ने परीक्षा दी थी। वहीं, क्लास 10 में भी छात्र इस विकल्प का फायदा उठा रहे थे। 2025 में 375 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया और 311 ने परीक्षा दी। वहीं 2024 में 330 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 267 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए।

एडिशनल सब्जैक्ट का फायदा कैसे मिलता था?

अब तक क्लास 12वीं पास करने के बाद छात्रों को 2 साल तक किसी अतिरिक्त विषय की परीक्षा देने का मौका मिलता था। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी छात्र ने 11वीं-12वीं में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी ली थी, तो वह अगले साल मैथ्स का पेपर देकर जेईई जैसी परीक्षाओं में शामिल हो सकता था। क्लास 12वीं के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त विषय का ऑप्शन था, जबकि क्लास 10वीं में छात्र 2 विषय तक चुन सकते थे लेकिन शर्त ये थी कि उन विषयों में प्रोजैक्ट वर्क हो सकता था, प्रैक्टिकल नहीं।

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