Edited By Kalash,Updated: 18 Apr, 2026 12:29 PM

गैस सिलेंडरों की कमी और बढ़ती महंगाई के कारण शहर के रेस्टोरेंट और फूड शॉप्स ने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं।
जालंधर (धवन): खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। गैस सिलेंडरों की कमी और बढ़ती महंगाई के कारण शहर के रेस्टोरेंट और फूड शॉप्स ने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और घरेलू बजट भी प्रभावित हो रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां खाना ऑर्डर करना आसान और किफायती था, वहीं अब उन्हें बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ रहा है। खासकर होम डिलीवरी का खर्च काफी बढ़ गया है, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण उन्हें अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।
दूसरी ओर, रेस्टोरेंट और फूड शॉप्स के मालिकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी कमी के चलते उन्हें मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं। उनका कहना है कि बाजार में गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें ब्लैक में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। इससे उनकी लागत में काफी इजाफा हुआ है। व्यापारियों ने यह भी बताया कि केवल गैस ही नहीं, बल्कि परिवहन खर्चों में वृद्धि के कारण भी खाद्य सामग्री महंगी हो गई है। सब्जियां, अनाज और अन्य जरूरी सामान के दाम बढ़ने से खाने की चीजों की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार से मांग की जा रही है कि गैस आपूर्ति को सुचारू बनाया जाए और कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
इसके अलावा, शहर के कई छोटे ढाबा संचालकों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने भी चिंता जताई है कि बढ़ती लागत के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि सीमित मुनाफे में काम करने वाले इन छोटे कारोबारियों के लिए बढ़े हुए खर्च को सहन करना मुश्किल हो रहा है। कई विक्रेताओं ने बताया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उन्हें अपने स्टॉल अस्थायी रूप से बंद करने पड़ सकते हैं या कर्मचारियों की संख्या कम करनी पड़ सकती है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह स्थिति केवल खाद्य उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की क्रय शक्ति घट रही है, जिससे बाजार में मांग कम हो सकती है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में गिरावट आने की आशंका भी जताई जा रही है, जो आगे चलकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखा जाए और गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से राहत पैकेज या सबसिडी देने की भी मांग की है, ताकि इस महंगाई के दौर में लोगों को कुछ राहत मिल सके।
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