गैस सप्लाई संकट से लोग परेशान, सिलेंडर के लिए करना पड़ रहा इंतजार

Edited By Kamini,Updated: 15 Apr, 2026 04:01 PM

people distressed by gas supply crisis

खाड़ी क्षेत्र में अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ हार्मोज को लेकर किसी ठोस समाधान के सामने न आने के कारण गैस सप्लाई को लेकर लोगों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

जालंधर (धवन): खाड़ी क्षेत्र में अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ हार्मोज को लेकर किसी ठोस समाधान के सामने न आने के कारण गैस सप्लाई को लेकर लोगों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि आम उपभोक्ता अब वैकल्पिक प्रबंध करने को मजबूर हो गए हैं। अमरीका द्वारा समुद्र में अपने युद्धपोत तैनात किए जाने और ईरान से आने वाले जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। पिछले करीब सवा महीने से ईरान से गैस की नियमित सप्लाई बाधित रहने के चलते घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

तेल कंपनियों की ओर से गैस एजैंसियों को पर्याप्त मात्रा में सिलैंडर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पा रही। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी पूरी तरह विफल साबित हो रही है। कंपनियों द्वारा यह दावा किया गया था कि ऑनलाइन बुकिंग से उपभोक्ताओं को लंबी कतारों से राहत मिलेगी, लेकिन हकीकत में बुकिंग के बाद भी 10 से 15 दिनों तक सिलैंडर की डिलीवरी नहीं हो रही।

इसके चलते उपभोक्ताओं को बार-बार गैस एजैंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं में रोष भी देखा जा रहा है। वहीं, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। गैस एजैंसियों को मिलने वाले सिलैंडरों का ऑडिट अभी तक नहीं हो पाया है। यदि समय पर ऑडिट किया जाता तो यह स्पष्ट हो सकता था कि कितने सिलैंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचे और कितने ब्लैक मार्कीट में बेचे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए गैस वितरण प्रणाली का सख्ती से ऑडिट होना बेहद जरूरी है। साथ ही, सरकार और संबंधित विभागों को इस संकट के समाधान के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

इस संकट के बीच छोटे उद्योगों और ढाबा संचालकों पर भी गहरा असर पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण उनके कामकाज पर सीधा प्रभाव पड़ा है, जिससे उत्पादन और सेवाओं में गिरावट आई है। कई व्यापारियों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो उन्हें अस्थायी रूप से अपना काम बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था की जाए और स्थानीय स्तर पर स्टॉक बढ़ाया जाए। इसके अलावा, ब्लैक मार्कीटिंग पर सख्त कार्रवाई करने और दोषी गैस एजैंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठ रही है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

वहीं, जानकारों का कहना है कि जब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक इस तरह की समस्याएं बनी रह सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करें, ताकि भविष्य में इस तरह के संकट से निपटा जा सके और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो।

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