Edited By Kalash,Updated: 30 May, 2026 11:58 AM

रीजनल ट्रांसपोर्ट कार्यालय (आरटीओ) के अधीन आते ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में आज तकनीकी खामी ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
जालंधर (चोपड़ा): रीजनल ट्रांसपोर्ट कार्यालय (आरटीओ) के अधीन आते ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में आज तकनीकी खामी ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। टेस्ट ट्रैक पर लगा पार्किंग कैमरा अचानक खराब हो जाने के कारण ड्राइविंग टेस्ट का काम लगभग पूरे दिन ठप पड़ा रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने पहुंचे लोगों को भीषण गर्मी में घंटों परेशान होना पड़ा।
जिक्र योग्य है कि पंजाब सरकार द्वारा गर्मी के चलते सरकारी दफ्तरों का समय सुबह 7.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक निर्धारित किया गया है, लेकिन सेंटर में सुबह काम शुरू होते ही महज एक टेस्ट के बाद ट्रैक पर लगा कैमरा बंद हो गया। कैमरा खराब होने के कारण ऑटोमेटेड टेस्ट प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई और सैकड़ों आवेदकों की लंबी कतारें लग गईं।
एआरटीओ विशाल गोयल ने तकनीकी स्टाफ और ऑपरेटरों को बुलाकर कैमरा ठीक करवाने का प्रयास किया, लेकिन कई घंटों तक सिस्टम चालू नहीं हो सका। आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर करीब 1 बजे कैमरा कुछ समय के लिए ठीक हुआ और टेस्ट प्रक्रिया दोबारा शुरू हो पाई। लेकिन तब तक अधिकतर आवेदक निराश होकर वापस लौट चुके थे क्योंकि सरकारी समय समाप्त होने में केवल कुछ मिनट ही बचे थे।
सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को उठानी पड़ी जो सुबह-सुबह दूर दराज इलाकों से टेस्ट देने पहुंचे थे। सेंटर परिसर में उचित इंतजाम न होने के कारण लोग तपती धूप और गर्म हवाओं के बीच ट्रैक के पास बने छोटे से ऑपरेटर रूम के बाहर खड़े रहने को मजबूर रहे। कई लोग लोहे की चादरों की बनी छत के नीचे खड़े रहे, जहां गर्मी और उमस ने हालात और खराब कर दिए।
आवेदक रवि कुमार ने गुस्से में कहा कि सरकार डिजिटल सिस्टम की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन यहां एक कैमरा खराब होने से पूरा काम बंद हो गया। सुबह 7 बजे से खड़े हैं, न पानी की उचित व्यवस्था है और न बैठने की।” एक अन्य आवेदक मनप्रीत सिंह ने कहा कि हम छुट्टी लेकर आए थे। अगर सिस्टम संभाल नहीं सकते तो लोगों को ऑनलाइन स्लॉट क्यों दिए जाते हैं? पूरा दिन खराब हो गया।” महिला आवेदक पूजा शर्मा ने कहा कि धूप में खड़े-खड़े महिलाओं और बुजुर्गों की हालत खराब हो रही थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे सेंटरों पर बैकअप सिस्टम रखना चाहिए ताकि लोगों को परेशान न होना पड़े।
लोगों का कहना था कि जब टेस्ट पूरी तरह कैमरों और ऑटोमेटेड सिस्टम पर निर्भर है तो तकनीकी खराबी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तैयार होनी चाहिए। लेकिन आज की घटना ने यह साबित कर दिया कि सिस्टम के नाम पर आम लोगों को सिर्फ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहर तक कैमरा ठीक होने के बावजूद सीमित समय के कारण बहुत कम लोगों के टैस्ट हो सके, जबकि बड़ी तादाद में आवेदकों को बिना टैस्ट दिए वापस लौटना पड़ा। इस संबंध में एआरटीओ विशाल गोयल ने बताया कि आज जिन लोगों के टेस्ट नहीं हो सके, उन्हें सोमवार को दोबारा बिना फीस और बिना नई अपॉइंटमेंट के पहले ली अप्वाइंटमेंट को री-शेड्यूल करके प्राथमिकता के आधार पर मौका दिया जाएगा।
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