जालंधर में निगम के ट्यूबवैल सिस्टम पर गहराया संकट, जल सप्लाई हो सकती है प्रभावित

Edited By Kalash,Updated: 19 May, 2026 01:36 PM

jalandhar water supply trouble

नगर निगम और बिजली बोर्ड के बीच चल रहे वित्तीय विवाद के बीच अब शहर की स्ट्रीट लाइटों के साथ-साथ निगम के ट्यूबवैल सिस्टम पर भी संकट गहराता दिखाई दे रहा है।

जालंधर (खुराना): नगर निगम और बिजली बोर्ड के बीच चल रहे वित्तीय विवाद के बीच अब शहर की स्ट्रीट लाइटों के साथ-साथ निगम के ट्यूबवैल सिस्टम पर भी संकट गहराता दिखाई दे रहा है। नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने स्वीकार किया है कि बिजली बोर्ड ने प्रीपेड मीटर पालिसी की आड़ में शहर के कुछ इलाकों में स्ट्रीट लाइट कनैक्शन डिस्कनैक्ट किए हैं और आने वाले समय में यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है।

कमिश्नर ने कहा कि केवल स्ट्रीट लाइट ही नहीं, बल्कि शहर में चल रहे निगम के ट्यूबवैलों पर भी प्रीपेड मीटर लगाने के आदेश हैं। उन्होंने माना कि प्रीपेड सिस्टम में यह प्रावधान होता है कि यदि मीटर में रिचार्ज राशि समाप्त हो जाए तो बिजली सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है और कनैक्शन काटने के लिए अलग से किसी कर्मचारी को मौके पर भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऐसे में यदि भविष्य में किसी ट्यूबवेल के प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म हो गया तो संबंधित ट्यूबवैल भी तत्काल बंद हो सकता है, जिससे शहर की जल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

कमिश्नर ने यह भी खुलासा किया कि नगर निगम और पावरकॉम के बीच पिछले लगभग तीन वर्षों से कोई नियमित हिसाब-किताब नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड द्वारा उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में जो इलैक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूली जाती है, उसका हिस्सा नगर निगम को मिलना होता है। निगम का दावा है कि बिजली बोर्ड की ओर से करोड़ों रुपए निगम खाते में जमा होने चाहिए, लेकिन दोनों विभागों के बीच खातों का मिलान न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि किस विभाग को कितनी राशि लेनी है या देनी है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर कमिश्नर ने बिजली बोर्ड के उच्च अधिकारियों से फोन पर बातचीत भी की है और लंबित हिसाब-किताब जल्द से जल्द सैटल करने को कहा है। हालांकि पावरकॉम अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर उनके पास पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और विस्तृत हिसाब-किताब पटियाला स्थित उच्च कार्यालयों के पास मौजूद है। बताया जा रहा है कि अब नगर निगम की ओर से एक अधिकारी की विशेष ड्यूटी लगाई जा रही है, जो पावरकॉम के साथ बैठकर खातों का मिलान करेगा। इसके बाद शहर में निगम के स्ट्रीट लाइट और ट्यूबवेल कनेक्शनों को चरणबद्ध तरीके से प्रीपेड मीटर प्रणाली में लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

गौरतलब है कि इससे पहले शहर के एम.एस. फार्म रोड स्थित कमल विहार कॉलोनी सहित कई इलाकों में बिजली बोर्ड ने बिना नियमित मीटर वाले स्ट्रीट लाइट कनैक्शन काटने शुरू कर दिए थे। उस समय यह मामला सामने आया था कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए लगभग 73 हजार एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट प्वाइंट के लिए समुचित मीटरिंग और विधिवत बिजली कनैक्शन व्यवस्था विकसित नहीं की गई। आरोप लगे थे कि कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें आज भी अस्थायी या कुंडी कनैक्शनों के सहारे चलाई जा रही हैं, जिससे बिजली बोर्ड पर अतिरिक्त लोड पड़ रहा है और बिजली चोरी की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। अब प्रीपेड मीटर पालिसी लागू होने के बाद नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह बिजली बोर्ड के साथ लंबित वित्तीय विवाद को सुलझाए और शहर की स्ट्रीट लाइट व जल सप्लाई व्यवस्था को बिना रुकावट जारी रख सके।

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