Edited By Urmila,Updated: 24 Mar, 2026 12:01 PM

शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया स्मार्ट सिटी सी.सी.टी.वी. प्रोजेक्ट अब गंभीर विवादों में घिरता जा रहा है।
अमृतसर (रमन) : शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया स्मार्ट सिटी सी.सी.टी.वी. प्रोजेक्ट अब गंभीर विवादों में घिरता जा रहा है। पंजाब सरकार व निगम की लापरवाही के कारण लगभग 94 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह प्रोजैक्ट अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो सका, जिससे लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर निगम कार्यालय रणजीत एवेन्यू में बनाए गए मुख्य कार्यालय, जिसमें पूरे शहर शहर में लगे 1194 सी.सी.टी.वी. कैमरों की स्क्रीन के जरिए स्टाफ और पुलिसकर्मियों द्वारा निगरानी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि कई अपराधिक मामलों को इन कैमरों की मदद से सुलझाया गया है।
इसे लेकर समाज सेवक अमृतपाल सिंह बब्बलू ने पूरे प्रोजैक्ट पर सवाल उठाए गए है कि 94 करोड़ रुपए का यह प्रोजैक्ट लाया गया, लेकिन इसमें घोटाले की आशंका है, जिसे लेकर प्रशासन के पास 2025 से लेकर आर.टी.आई. डाली गई है, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। जिसको लेकर स्टेट इनफोरमेशन कमिश्न से भी अपील की गई न तो वहां का कोई अधिकारी पेश होता है और न ही जवाब दाखिल किया जाता है।
अगर प्रोजैक्ट में कोई गड़बड़ी नहीं है तो आर.टी.आई. के जवाब क्यों नहीं दिए जा रहे। अधिकारी जवाब देने से भाग रहे है, इसलिए प्रोजैक्ट में घोटाले की बदबू आ रही है। आर.टी.आई. इसलिए लगाई जाती है कि संबंधित विभाग द्वारा समय पर जवाब नहीं दिया जाता। इसके साथ पारदर्शिता से भी सवाल खड़े हो रहे है।
कैमरे लगे, लेकिन सिस्टम नहीं चला
शहर के मुख्य चौक-चौराहों और संवेदनशील इलाकों में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन उनकी पूरी मानिटरिंग तो हो रही है लेकिन नैटवर्क अभी तक पूरी तरह सही तरीके से काम नहीं कर रहा।
ई-चालान प्रणाली भी नाकाम
इस प्रोजैक्ट का एक अहम हिस्सा ई-चालान सिस्टम था, जिससे ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर अपने आप कार्रवाई होनी थी, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह सिस्टम या तो शुरू ही नहीं हुआ या बहुत सीमित स्तर पर चल रहा है।
इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद प्रोजैक्ट का अधूरा रहना अब बड़े स्तर पर गड़बड़ी और घोटाले की आशंका को बढ़ा रहा है। समाज सेवियों व शहरवासियों द्वारा फंड के उपयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों व संस्थाओं द्वारा इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही कार्रवाई न हुई तो यह प्रोजैक्ट सरकारी पैसे की बर्बादी बनकर रह जाएगा। प्रशासन की चुप्पी ने बधाई चिंता इस मामले पर आज एक प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया, जिससे लोगों में चिंता ओर बढ़ गई है।
क्या कहना है अधिकारियों का?
संदीप सिंह सुपरिंटैंडैंट इंजीनियर नगर निगम ने कहा कि शहर में 1194 सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए जा चुके हैं, जिसकी पूरी निगरानी नगर निगम कार्यालय से की जा रही है, जहां पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। ई-चालान को लेकर कुछ चौको व रीकारपेटिंग का कहा गया था वह लगभह पूरी हो चुकी है। लगता है कि आने वाले 10 दिनों में ई-चालाक सिस्टम शुरू हो जाएगा। पूरे प्रोजैक्ट 94 करोड़ के करीब का था, जिसका 40 करोड़ रुपए के लगभग सिस्टम लगाने में खर्चा किया गया है और 50 करोड़ जो प्रोजैक्ट है, वह संभाल का है जोकि अभी शुरू नहीं हुआ है। पूरे प्रोजैक्ट पारदर्शिता के साथ हुआ है और सभी जानकारी वैबसाइटों पर उपलब्ध है।
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