पंजाब में 600 करोड़ का प्रोजेक्ट ठप, बड़ी गिनती में बंद हो गई सरकार की बसें

Edited By Kalash,Updated: 18 Mar, 2026 02:23 PM

government buses project

अमृतसर में करोड़ों रुपए की लागत से बनाया गया बी.आर.टी.एस. (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और सिटी बस प्रोजैक्ट आज पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।

अमृतसर (रमन) : अमृतसर में करोड़ों रुपए की लागत से बनाया गया बी.आर.टी.एस. (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और सिटी बस प्रोजैक्ट आज पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। एक समय शहर के विकास की पहचान के रूप में पेश किए गए ये प्रोजैक्ट अब कबाड़ बनकर खड़े हैं, जिससे लोगों का टैक्स का करोड़ों रुपया बर्बाद हो गया है। बता दें कि लगभग 600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस प्रोजैक्ट के तहत 90 से अधिक ए.सी. बसें खरीदी गईं और करीब 35 बस स्टॉप बनाए गए। जी.टी. रोड पर ऊंचा कॉरिडोर तैयार किया गया और बस स्टॉप तक पहुंच के लिए लिफ्टें भी लगाई गईं।

दावा किया गया था कि इससे ट्रैफिक की समस्या कम होगी और लोगों को सस्ती व आसान सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी, लेकिन मौजूदा हालात इसके विपरीत हैं। बसें बिना उपयोग के खड़ी धूल खा रही हैं, बस स्टॉप की छतें खराब हो चुकी हैं और पूरा ढांचा खंडहर बनता जा रहा है। लिफ्टें बंद पड़ी हैं और रखरखाव के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं लोगों में उक्त प्रोजैक्ट के फेल होने से रोष हैं, जिसका जनता सरकार से हिसाब मांग रही है। शहरवासियों का कहना है कि वे मेहनत करके टैक्स भरते हैं, लेकिन सरकारें इसे लापरवाही से बर्बाद कर रही हैं। लोगों के अनुसार यह सिर्फ नाकामी नहीं, बल्कि बड़े स्तर की लापरवाही है जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

पहले खाली दौड़ाई गईं, फिर बंद कर दी गईं बसें 

लोगों का आरोप है कि शुरुआत में बसें खाली दौड़ती रहीं और जब लोगों ने इसका उपयोग करना शुरू किया तो सेवा ही बंद कर दी गई, जिससे पूरा प्रोजैक्ट बेकार हो गया। शहरवासियों ने सुझाव दिया है कि बी.आर.टी.एस. के लिए बनाई गई अलग लेन को ऑटो-रिक्शा या अन्य सार्वजनिक वाहनों के लिए खोल दिया जाए, ताकि ट्रैफिक समस्या कम हो सके और इस ढांचे का कुछ उपयोग हो सके।

तीर्थ यात्रा योजना में बी.आर.टी.एस. बसों का उपयोग क्यों नहीं?

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत बाहर से निजी बसें मंगवाई जा रही हैं, जिन पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जब बी.आर.टी.एस. की बसें पहले से ही बंद पड़ी थीं तो उनका उपयोग क्यों नहीं किया गया। यदि इन बसों का उपयोग किया जाता तो सरकारी खर्च में कमी लाई जा सकती थी।

सिटी बस स्टैंड में चोरी, जिम्मेदार कौन? 

सिटी बस स्टैंड में खड़ी बसों से कीमती सामान चोरी होने के मामले भी सामने आ रहे हैं, लेकिन अब तक न तो किसी जिम्मेदार को तय किया गया है और न ही कोई ठोस जांच की गई है। यह मामला अब सिर्फ एक प्रोजैक्ट की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और योजना निर्माण पर बड़ा सवाल बन गया है। शहर के लोग इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस 600 करोड़ रुपए की बर्बादी के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा या नहीं।

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