पंजाब: ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बड़ा झटका, खड़ी हुई नई मुसीबत

Edited By Urmila,Updated: 11 Mar, 2026 02:26 PM

driving license license in punjab

एक तरफ जहां पिछले कुछ महीनों में विजिलेंस डिपार्टमेंट ने पंजाब के दूसरे जिलों की तरह अमृतसर के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर भी रेड करके काफी रिकॉर्ड जब्त किया था

अमृतसर (नीरज): एक तरफ जहां पिछले कुछ महीनों में विजिलेंस डिपार्टमेंट ने पंजाब के दूसरे जिलों की तरह अमृतसर के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर भी रेड करके काफी रिकॉर्ड जब्त किया था और कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी, उसके बावजूद ड्राइविंग लाइसेंस की पेंडेंसी फिर से सैकड़ों में पहुंच गई है। जानकारी के मुताबिक, यह संख्या एक हजार के आसपास हो सकती है। हालांकि, ए.डी.टी.ओ. मंदीप सिंह सोही का कहना है कि पेंडेंसी 700 से 800 के बीच है और वह हर दिन 200 से ज्यादा एप्लीकेशन का निपटारा कर रहे हैं। दूसरी तरफ, पिछले कुछ दिनों से यह भी देखा जा रहा है कि ए.डी.टी.ओ. सोही ट्रैक पर मौजूद अपने ऑफिस में बैठने के बजाय सेक्रेटरी आर.टी.ए. ऑफिस में बैठते हैं। इस वजह से ट्रैक पर आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रैक ऑफिस के बाहर कोई साइन नहीं लगा है कि अधिकारी कब और कहां मिलेंगे। इस स्थिति के कारण लोग भटकते रहते हैं और इसी गैरमौजूदगी के कारण कुछ एजेंट फिर से ट्रैक पर एक्टिव दिखने लगे हैं।

पूरा स्टाफ किया गया था तब्दील

विजिलेंस रेड के बाद पता चला कि ट्रांसपोर्ट सेवा सोसायटी के कुछ कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी कई सालों से एक ही सीट पर तैनात थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें ट्रैक से हटाकर आर.टी.ए. ऑफिस में बिना पब्लिक डीलिंग वाली सीटों पर तैनात कर दिया गया। हालांकि, अब चर्चा है कि कुछ कर्मचारी फिर से ट्रैक पर तैनात होने के लिए जोर लगा रहे हैं।

बुनियादी सुविधाओं की हालत खराब 

ट्रैक की चार दीवारें कई जगहों से टूटी हुई हैं, जिन्हें तुरंत रिपेयर की जरूरत है। यह रिपेयर पास में रेगो ब्रिज के काम की वजह से पेंडिंग है, जिसका फायदा उठाकर कोई भी दीवार फांदकर अंदर आ सकता है। यहां पहले भी सामान चोरी होने की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा, गर्मी का मौसम आने के बावजूद यहां पीने के पानी या बैठने के लिए शेड की कोई सही सुविधा नहीं है, जिससे लोग परेशान होते हैं और एजेंटों के चंगुल में फंस जाते हैं।

विवादों से पुराना नाता

अकाली-BJP सरकार के समय बना यह ट्रैक शुरू से ही विवादों में रहा है। कई बार ऐसे हालात बने जब विदेश में बैठे लोगों के लाइसेंस भी बिना ट्रैक पर आए बन गए। एक समय तो यहां भारत-पाकिस्तान बॉर्डर जैसी फेंसिंग (तार) लगा दी गई थी ताकि कोई वीडियोग्राफी न कर सके। विजिलेंस की रेड के बाद कुछ समय तक दहशत रही, लेकिन अब हालात पुराने रंग में लौटने लगे हैं। दो की जगह सिर्फ एक अफसर। विजिलेंस ऑपरेशन के बाद यहां दो ए.डी.टी.ओ. तैनात किए गए थे, लेकिन एक अफसर के पठानकोट ट्रांसफर होने के बाद अब पूरा बोझ एक ही अफसर पर है। लोगों की सुविधा के लिए यहां कम से कम दो अफसरों का होना जरूरी माना गया है।

26 फरवरी तक की पेंडेंसी हल हो गई है: ए.डी.टी.ओ.

पेंडेंसी के बारे में पूछे जाने पर ए.डी.टी.ओ. मंदीप सिंह सोही ने कहा कि 26 फरवरी तक के आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सेक्रेटरी आर.टी.ए. उन्हें ऑफिस के काम से हेड ऑफिस बुलाते हैं। अगर कोई उनसे मिलना चाहता है तो वह आर.टी.ओ. ऑफिस आकर उनसे मिल सकता है।

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