Edited By VANSH Sharma,Updated: 22 Mar, 2026 12:13 AM

नगर निगम में एम.टी.पी और एस्टेट विभाग का कामकाज अभी भी सिर्फ राम भरोसे चल रहा है।
अमृतसर (रमन): नगर निगम में एम.टी.पी और एस्टेट विभाग का कामकाज अभी भी सिर्फ राम भरोसे चल रहा है। इसका सीधा प्रमाण आई.डी.एच मार्केट में दो सरकारी दुकानों के ऊपर चल रहे चार मंजिला अवैध निर्माण से मिलता है।
पंजाब केसरी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो संबंधित अधिकारियों और नेताओं ने खबर रोकने के लिए फोन और रिश्वत की पेशकश भी की। लेकिन खबर किसी कीमत पर नहीं रुकी और इसका रोजाना फॉलोअप किया जा रहा है। नगर निगम के एटीपी ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर को भेजकर काम रोकने की कार्रवाई की, लेकिन उसके बाद फिर से निर्माण जारी रहा।
एडवोकेट गगन बाली ने बताया कि दो साल पहले दुकान नंबर 24 को लेकर आर.टी.आई. और शिकायत दर्ज करवाई गई थी। उस समय निगम के एटीपी ने यह बताया था कि इस दुकान पर केवल ढाई मंजिला निर्माण ही किया जा सकता है। बावजूद इसके, एम.टी.पी नरेन्द्र शर्मा ने शिकायतों के बावजूद केवल कागजी कार्रवाई की और असल में कोई रोकथाम नहीं हुई।
एडवोकेट बाली ने कहा कि इस बार दुकान नंबर 24 के साथ-साथ दुकान नंबर 14-15 के मामले में भी निगम कमिश्नर बिकरमजीत सिंह शेरगिल, एम.टी.पी नरेन्द्र शर्मा और एस्टेट अधिकारी सुशांत भाटिया के खिलाफ कोर्ट में रिट दायर की जाएगी। यह रिट अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और उनके अधिकारों के दुरुपयोग का मामला होगी।
वर्तमान समय में मार्केट में यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। कहा जा रहा है कि इस निर्माण में काली भेड़ों की मिलीभगत है। यदि निगम प्रशासन ने सभी अवैध निर्माण को हटाया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस अधिकारी या नेता की मिलीभगत रही। सूत्रों के अनुसार, इस निर्माण में सत्ताधारी नेता के करीबी का नाम भी चर्चा में है, और यह मामला हाईकमान तक पहुँच गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पर कार्रवाई कितनी जल्दी होती है।
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