Edited By Kalash,Updated: 23 Mar, 2026 02:17 PM

जहां एक ओर बढ़ता कचरा शहरों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है, वहीं औद्योगिक नगरी लुधियाना से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है।
लुधियाना (गणेश): जहां एक ओर बढ़ता कचरा शहरों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है, वहीं औद्योगिक नगरी लुधियाना से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। शहर के युवा सामाजिक उद्यमी गौरव सिंह ने कचरे को समस्या नहीं, बल्कि अवसर में बदलते हुए समाज के लिए एक अनोखा मॉडल प्रस्तुत किया है। उनकी संस्था स्विच फॉर चेंज फाउंडेशन पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
‘तीन स्तंभ’ बने बदलाव की धुरी
गौरव सिंह की यह पहल तीन मुख्य आधारों—पर्यावरण, सशक्तिकरण और शिक्षा—पर आधारित है, जिसने कचरे के प्रबंधन को समाज सुधार से जोड़ दिया है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम
संस्था लोगों को नकद दान देने के बजाय ‘सूखा कचरा’ देने के लिए प्रेरित कर रही है। अब तक 50,000 किलोग्राम से अधिक कचरा भूमि में दबने से बचाया जा चुका है। ‘कचरे से ज्ञान’ परियोजना के तहत घरों, स्कूलों और आवासीय क्षेत्रों से सीधे सूखा कचरा एकत्र किया जाता है, जिसमें पुराने कपड़े और प्लास्टिक जैसी वस्तुं शामिल हैं।

रोजगार के नए अवसर तैयार
एकत्र किए गए कचरे को प्रसंस्करण के बाद उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को जोड़ा गया है, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इससे सीधा लाभ मिल रहा है।

शिक्षा को मिल रहा सहारा
कचरे के पुनः उपयोग से प्राप्त आय का बड़ा हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर खर्च किया जाता है। यही कचरा आज कई बच्चों की फीस और किताबों का आधार बन रहा है।

नगर निगम के साथ संचालित पुनः उपयोग केंद्र
संस्था नगर निगम लुधियाना के सहयोग से ‘घटाओ, पुनः उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो’ केंद्र संचालित कर रही है, जहां पूरे वर्ष कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है। यह मॉडल पूरी तरह आत्मनिर्भर है और किसी बाहरी आर्थिक सहायता पर निर्भर नहीं करता।

स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि कचरे के ढेर कई बीमारियों का कारण बनते हैं। ऐसे में यह पहल न केवल पर्यावरण को स्वच्छ बना रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव और इलाज के खर्च को भी कम कर रही है।

समाज के लिए प्रेरणा
यह पहल साबित करती है कि सही सोच और प्रयास के साथ कचरा भी संसाधन बन सकता है। गौरव सिंह का यह मॉडल अब अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।
अपील
अपील की जा रही है कि यदि आम लोग अपने घरों का सूखा कचरा सही दिशा में दें, तो यह न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि किसी जरूरतमंद बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी मजबूत करेगा।

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