लुधियाना नगर निगम बजट के आंकड़ों में गड़बड़ी, पूर्व पार्षद ने लगाए गंभीर आरोप

Edited By VANSH Sharma,Updated: 23 Mar, 2026 10:31 PM

irregularities in ludhiana municipal corporation budget figures

नगर निगम लुधियाना के आगामी बजट को लेकर सियासी माहौल पहले ही गरमा गया है।

लुधियाना (विक्की): नगर निगम लुधियाना के आगामी बजट को लेकर सियासी माहौल पहले ही गरमा गया है। पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु की पत्नी और पूर्व पार्षद ममता आशु ने फेसबुक पोस्ट के जरिए बजट के आंकड़ों में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

ममता आशु ने कहा कि बजट संतुलित नहीं है और इसमें प्राथमिकताओं की कमी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विभागों के बजट बिना ठोस आधार के घटाए और बढ़ाए गए हैं, जिससे पूरी योजना पर सवाल उठते हैं। उन्होंने मांग की कि बजट बैठक में हर आंकड़े पर विस्तार से चर्चा हो और जनता के टैक्स का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।

आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप

ममता आशु ने सबसे पहले एक्साइज ड्यूटी के आंकड़ों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में इस आय को 34.54 करोड़ रुपये दर्शाया गया था, जबकि 2025-26 और 2026-27 के लिए इसे घटाकर सिर्फ 15 करोड़ रुपये कर दिया गया। ममता आशु ने पूछा कि जब शहर में शराब के ठेकों की संख्या बढ़ रही है, तो आय में इतनी गिरावट कैसे हो सकती है।

बागवानी विभाग (हॉर्टिकल्चर) का बजट भी उन्होंने निशाने पर लिया। उनके अनुसार, 2024-25 में बजट 51 लाख रुपये और 2025-26 में 65 लाख रुपये रखा गया, जबकि वास्तविक खर्च सिर्फ 42 लाख रुपये हुआ। इसके बावजूद 2026-27 के लिए बजट बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया जाना सही नहीं है।

सड़कें, स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों पर कम ध्यान

सड़कों की खराब हालत पर ध्यान देते हुए ममता आशु ने बी एंड आर (बिल्डिंग एंड रोड) शाखा के बजट में कटौती को गलत ठहराया। उन्होंने बताया कि 2024-25 में बजट 1.32 करोड़ रुपये और 2025-26 में 1.5 करोड़ रुपये था, जबकि खर्च 1.1 करोड़ रुपये हुआ। इसके बावजूद 2026-27 के लिए इसे घटाकर 1 करोड़ रुपये कर देना शहर की जरूरतों को नजरअंदाज करना है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट पर भी उन्होंने प्रशासन को घेरा। ममता आशु ने कहा कि कैंसर और नशा मुक्ति जैसी गंभीर योजनाओं के लिए पहले कोई बजट नहीं रखा गया, जबकि खर्च 12.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब 2026-27 के लिए सिर्फ 1.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो योजना में गड़बड़ी और लापरवाही को दिखाता है।

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