लुधियाना सिविल अस्पताल की मॉर्चरी बनी 'मुर्दाघर', पुलिस की बेरुखी से फूलने लगीं लाशें, सांस लेना भी हुआ दूभर

Edited By Vatika,Updated: 19 Mar, 2026 08:27 AM

ludhiana civil hospital

हर के सिविल अस्पताल की मॉर्चरी इस समय लावारिस लाशों के बोझ तले कराह रही है।

लुधियाना (राज): शहर के सिविल अस्पताल की मॉर्चरी इस समय लावारिस लाशों के बोझ तले कराह रही है। एक तरफ जहां मौत का मातम है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया सिस्टम की बेरुखी ने अस्पताल प्रबंधन की रातों की नींद उड़ा दी है। आलम यह है कि मॉर्चरी में लावारिस शवों का अंबार लग गया है और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। मौजूदा समय में यहां 20 ऐसे बदनसीबों के शव पड़े हैं, जिनका वारिस बनने के लिए कोई सामने नहीं आया है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से बार-बार पुलिस को रुक्के भेजे गए, रिमाइंडरों की झड़ी लगा दी गई, लेकिन खाकी की सुस्ती के चलते इन शवों को अंतिम विदाई नसीब नहीं हो पा रही है।

हैरानी की बात तो यह है कि इन 20 में से 10 शव ऐसे हैं जो पिछले 9 से लेकर 41 दिनों से फ्रीजर में पड़े-पड़े गल रहे हैं। सरकारी फाइलों में ये महज एक नंबर हैं, लेकिन अस्पताल के लिए ये मुसीबत का सबब बन चुके हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल थाना मोती नगर खड़ा कर रहा है, क्योंकि इन 10 पुराने शवों में से अकेले 6 शव इसी थाना क्षेत्र से संबंधित हैं। अस्पताल की मॉर्चरी में सबसे पुराने 2 शव 7 फरवरी से पड़े हुए हैं, जो पुलिस की सुस्ती की गवाही दे रहे हैं। इनमें से 6 शव फरवरी महीने के हैं और 4 मार्च के, जिन्हें अब तक डिस्पोज ऑफ कर दिया जाना चाहिए था।

35 शवों की क्षमता वाली इस मॉर्चरी में अब नए शव रखने के लिए जगह तलाशना प्रबंधन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। मॉर्चरी धीरे-धीरे अज्ञात शवों से पूरी तरह भरने की कगार पर है। इन मृतकों में ज्यादातर वे लोग हैं जिनकी इलाज के दौरान अस्पताल में ही मौत हुई थी, जबकि कुछ सड़क हादसों का शिकार होकर यहां पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन अब इस कशमकश में है कि अगर पुलिस ने जल्द ही इन लावारिसों की सुध नहीं ली, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाएगी।

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