सैलानियों को जलियांवाला बाग के इतिहास से रू-ब-रू करवाएगा लाइट एंड शो

Edited By swetha,Updated: 30 Jun, 2019 11:45 AM

: जलियांवाला बाग में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले देशभक्तों के खून से सींची विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरती जहां केंद्र की मोदी सरकार द्वारा भाजपा पंजाब प्रधान व राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक के प्रयासों से 20 करोड़ की लागत से शुरू किए गए विकास कार्यों का...

अमृतसर(कमल) : जलियांवाला बाग में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले देशभक्तों के खून से सींची विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरती जहां केंद्र की मोदी सरकार द्वारा भाजपा पंजाब प्रधान व राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक के प्रयासों से 20 करोड़ की लागत से शुरू किए गए विकास कार्यों का उन्होंने जायजा लिया, वहीं इस ऐतिहासिक स्थान में विकास के दौरान होने वाले सौन्दर्यीकरण की प्रैजैंटेशन भी पत्रकारों के सामने रखी। यह सारे विकास कार्य अब जलियांवाला बाग ट्रस्ट के अधीन होंगे जिसका प्रधानमंत्री मोदी ने मलिक को ट्रस्टी नियुक्त किया है।

मलिक ने बताया कि सैलानियों को इसके इतिहास से रू-ब-रू करवाने के लिए लाइट एंड शो प्रोग्राम अंग्रेजी, ङ्क्षहदी और पंजाबी में 15 मिनट का होगा। यहां पर सैलानियों के लिए वातानुकूलित विजिटर गैलरी भी बनाई जाएगी और इसमें शहीदों के चित्र लगे होंगे, ताकि सभी को इसके बारे में जानकारी मिल सके। यहां पर स्थित ऐतिहासिक चिन्हों जैसे शहीदी कुआं, गोलियों के निशान व अन्य स्थलों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करने का काम शुरू कर दिया गया है। मलिक ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जलियांवाला बाग के पहले ट्रस्टी थे। देश की आजादी से लेकर 70 साल तक चली कांग्रेस सरकार में लम्बे समय से जलियांवाला बाग की स्थिति बहुत दयनीय बनी हुई थी और पर्यटकों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।  सौंदर्यीकरण किए जाने पर मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेतली व मंत्री हरदीप पुरी का धन्यवाद किया। 

थ्री-डी थिएटर भी बनेगा,10 मिनट की चलेगी डाक्युमैंट्री
उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग में एक थ्री-डी थिएटर भी बनाया जाएगा, जिसमें 10 मिनट की 3 डी डाक्युमैंट्री चलेगी और देखने वाले सैलानी खुद को इसका एक हिस्सा समझेंगे। यहां पर शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा लगेगी। मलिक ने कहा कि अंदर आने वाले रास्ते की दीवारों पर शहीदों की तस्वीरें बनाई जाएंगी। यहां पर सलामी के लिए बी.एस.एफ. के उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी, ताकि भारत-पाक सीमा पर होने वाली रिट्रीट सैरेमनी की तरह यहां पर सलामी परेड का आयोजन किया जा सके व शहीदों को रोज सलामी दी जा सके। 

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