पंजाब राज्य बनने के बाद एक बार फिर माझे से नहीं बना कोई मुख्यमंत्री

Edited By Tania pathak,Updated: 20 Sep, 2021 11:21 AM

once again no chief minister was made from maje

देश की आजादी के बाद पंजाब में अब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हमेशा मालवे क्षेत्र के नेताओं का प्रभाव रहा है। माझे से सबंधित प्रताप सिंह कैरों ही माझे से.....

गुरदासपुर (हरमन): देश की आजादी के बाद पंजाब में अब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हमेशा मालवे क्षेत्र के नेताओं का प्रभाव रहा है। माझे से सबंधित प्रताप सिंह कैरों ही माझे से सबंधित ऐसे नेता थे, जिन को पंजाब का मुख्यमंत्री बनने का गर्व हासिल हुआ जब कि बाद में एक बार भी इस क्षेत्र के किसी नेता के सिर पर मुख्यमंत्री का ताज नहीं सजा। उल्लेखनीय है कि पंजाब में कुल 117 विधान सभा सीटों में से करीब 69 सीटें केवल मालवा क्षेत्र से सबंधित हैं जबकि 23 सीटें दोआबा में हैं और माझे क्षेत्र में 25 सीटें हैं। 1 नवंबर 1966 को भाषा के आधार पर पंजाब के पुनर्गठन उपरांत अब तक बने 15 मुख्यमंत्री मालवे से ही सबंधित रहे हैं।

फिर निराश हुए माझे के लोग
आज घटे समूचे घटनाक्रम दौरान सुखजिन्दर सिंह रंधावा को मुख्यमंत्री और अरुना चौधरी को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की खबरें वायरल होने के बाद एक बार समूचे जिला गुरदासपुर के लोगों में नया उत्साह देखने को मिल रहा था। यहां तक कि रंधावा के गांव धारोवाली सहित समूचे हलके और जिले में कांग्रेसी वर्करों ने जश्न मनाने शुरू कर दिए। परन्तु हाईकमान की तरफ से बदले फैसले ने माझे के लोगों को दिखाई दी उम्मीद की किरण को फिर फीका कर दिया।

1956 से 1964 तक मुख्य मंत्री रहे थे माझे से सबंधित प्रताप सिंह कैरों
पंजाब के पुनर्गठन से पहले माझे से सबंधित प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ प्रताप सिंह कैरों 23 जनवरी 1956 से 21 जून 1964 तक पंजाब के मुख्य मंत्री रहे थे। उस मौके उन की तरफ से लिए गए फैसले और इस क्षेत्र के लिए किए कार्यों को आज भी लोग याद करते हैं। उन के बाद पंजाब के राजनैतिक हालातों में कई तरह के बदलाव आए। परन्तु इस क्षेत्र के किसी नेता को फिर मुख्य मंत्री की कुर्सी नसीब नहीं हुई। पंजाब के पुनर्गठन के बाद ज्ञानी गुरमुक्ख सिंह मुसाफ़िर पहले मुख्यमंत्री बने थे। उप पंजाब विधान परिषद के मैंबर थे। 1967 में हुई चुनाव के बाद अकाली दल के पहले मुख्य मंत्री जस्टिस गुरनाम सिंह मालवा क्षेत्र के किला रायपुर से नामजद हुए थे। राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री लक्ष्मण सिंह गिल भी मालवा क्षेत्र के धरमकोट हलके से चुने गए थे। इन के अतिरिक्त ज्ञानी जेल सिंह, प्रकाश सिंह बादल, दरबारा सिंह, सुरजीत सिंह बरनाला, बेअंत सिंह, हरचरन सिंह बराड़, रजिन्दर कौर भट्ठल और कैप्टन अमरिन्दर सिंह सहित अब तक के सभी मुख्य मंत्री मालवा क्षेत्र से ही सबंधित रहे हैं। अब मुख्य मंत्री बने चरनजीत सिंह चन्नी भी खरड़ के रहने वाले हैं, जो हलका चमकौर साहिब से विधायक हैं।

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