Edited By Subhash Kapoor,Updated: 11 Mar, 2026 08:19 PM

शिरोमणि अकाली दल की नेता और मजीठा से विधायक गनीव कौर मजीठिया ने बुधवार को पंजाब विधानसभा के अंदर एक प्रैस कांफ्रेस में कहा कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए नेशनल कमीशन फॉर विमेन से जल्दी ही संपर्क करेंगी ओर...
चंडीगढ़ : शिरोमणि अकाली दल की नेता और मजीठा से विधायक गनीव कौर मजीठिया ने बुधवार को पंजाब विधानसभा के अंदर एक प्रैस कांफ्रेस में कहा कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए नेशनल कमीशन फॉर विमेन से जल्दी ही संपर्क करेंगी ओर पंजाब की महिलाओं के खिलाफ उनके द्वारा भद्दी अशोभनीय बातों को लेकर शिकायत दर्ज करवाएंगी। दरअसल मान ने कथित तौर पर महिलाओं को नीचा दिखाने और भद्दी भाषा का इस्तेमाल करने वाली टिप्पणी की थी।
विधानसभा के अंदर पत्रकारों से बात करते हुए गवीन कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री को लुधियाना में एक भाषण के दौरान महिलाओं के बारे में की गई भद्दी ओर गंदी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मान माफी मांग लेते हैं, तो मामला वहीं खत्म हो सकता है, नहीं तो वह इस मुद्दे को नेशनल कमीशन फॉर विमेन के पास ले जाएंगी और मुख्यमंत्री को कानून के कटघरे में खड़ा करेंगी।
उन्होंने आगे कहा कि मोहाली में विरोध प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स और दूसरी महिला कर्मचारियों पर कथित हमले पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, महिला प्रदर्शनकारियों को लाठियों से पीटा गया और उनके दुपट्टे खींचे गए, उनको बेइज्जत किया गया, जिसे उन्होंने महिलाओं की इज्जत पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि कथित फेक एनकाऊंटर्स का मुद्दा भी कमीशन के सामने उठाया जाएगा, जिसमें एक मां का इकलौता बेटा मारा गया था ओर जो बेकसूरों के कथित इनकाउंटरस हो रहे हैं, वे भी माताओं के बेटे हैं।
उन्होंने कहा, “अगर मुख्यमंत्री लुधियाना में महिलाओं के बारे में कही गई बातों के लिए माफी नहीं मांगते हैं, तो हम निश्चित रूप से राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क करेंगे। हम महिलाओं को लाठियों से पीटे जाने, उनके दुपट्टे खींचे जाने और कथित फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा भी उठाएंगे, जिसमें एक मां ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया।”
पंजाब विधानसभा में कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा के बयान के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए, श्रीमती मजीठिया ने कहा कि उन्होंने न तो उनकी बातों का समर्थन किया और न ही विरोध किया, लेकिन उनका मानना है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका दिया जाना चाहिए था, जो हरेक विधायक का हक है।
उन्होंने आगे कहा, “मैं खैहरा के उस बयान के पक्ष में नहीं हूं और न ही उसका बचाव कर रही हूं। लेकिन उन्हें सुना जाना चाहिए था। आज भी उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। कोई भी संबंधित व्यक्ति का नतीजा निकालने से पहले उस व्यक्ति को सुना जाना चाहिए था ओर यहां सिर्फ नादिरशाही फरमान ही सुनाए जाते है।”
श्रीमती मजीठिया ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की भी आलोचना की, जिसे उन्होंने पंजाब विधानसभा का कीमती समय छोटी-छोटी बातों पर बर्बाद करने वाला बताया जबकि पंजाब के इतने सारे मुद्दे जो लंबित पड़े हुए है, यहां पर तो सिर्फ मुख्यमंत्री और मंत्रियों की इगो ही स्टसफाई की जाती है, जबकि पंजाब में किसानों का मुद्दा, बेरोजगारी का मुद्दा, कानून व्यवस्था का मुद्दा आदि इतने सारे मुद्दे हैं, जिन पर सकारात्मक बहस की जाती और सरकार लोगो का करोड़ो रुपया अपनी निजी खुंदक निकालने के लिए बर्बाद कर रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा को निजी विवादों के बजाय जनता की चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर रूलिंग पार्टी सच में महिलाओं की इज्ज़त को लेकर परेशान है, तो उसे कांग्रेस के लाए गए उस प्रस्ताव का सपोर्ट करना चाहिए था जिसमें मुख्यमंत्री के बयानों पर उनके खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई थी।
गनीव मजीठिया ने आगे कहा कि महिलाओं के खिलाफ ऐसे कमेंट्स किसी भी गौरतमंद पंजाबी को मंज़ूर नहीं हैं और ज़ोर देकर कहा कि पंजाब की बहादुर महिलाओं ने हमेशा बहादुर बेटों को जन्म दिया है और जिनसे समाज में उनकी इज़्ज़त बनी हुई है।