पंजाब में अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, दी यह चेतावनी

Edited By Urmila,Updated: 15 Apr, 2022 01:15 PM

in punjab teachers opened a front against the government

पंजाब के 13 हजार के करीब ई.जी.एस. अध्यापकों ने पंजाब की ‘आप’ सरकार खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यापकों ने पंजाब सरकार खिलाफ नारेबाजी करके अध्यापकों की तनख्वाहें बढ़ाने...

बरनाला (विवेक सिंधवानी,रवि): पंजाब के 13 हजार के करीब ई.जी.एस. अध्यापकों ने पंजाब की ‘आप’ सरकार खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यापकों ने पंजाब सरकार खिलाफ नारेबाजी करके अध्यापकों की तनख्वाहें बढ़ाने की मांग की। इस मौके संबोधन करते राज्य कन्वीनर सुखचैन सिंह ने कहा कि पंजाब में 13 हजार के करीब ई.जी.एस. अध्यापक पिछले 18 वर्षों से 6 हजार रुपए की मामूली तनख्वाह पर काम कर रहे हैं। पढ़े लिखे होने के बावजूद भी इन अध्यापकों का शोषण किया जा रहा है। आज के महंगाई के युग में एक मजदूर भी हर महीने 500 रुपए की दिहाड़ी करके 15000 रुपए महीना कमा लेता है। ये अध्यापक तो पढ़े-लिखे हैं।

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अध्यापकों ने बताया कि ‘आप’ पार्टी को वोटें डालीं थी कि सरकार आने पर ‘आप’ की सरकार उनकी बात सुनेगी। उनकी स्टेजों पर भी अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान ने उन्हें भरोसा दिया था कि पहली कैबिनेट बैठक में ही दिल्ली की तर्ज पर आपकी तनख्वाहें 36,000 रुपए महीना कर दी जाएंगी। कैबिनेट की बैठकों भी हो गई परन्तु उनकी तनख्वाहें नहीं बढ़ाईं गई। उनका अब ‘आप’ की सरकार से भरोसा टूट गया है। वह इस सम्बन्ध में शिक्षा मंत्री समेत पंजाब के मंत्रियों को भी मिल चुके हैं परन्तु उनकी किसी ने भी सार नहीं के ली। उनकी एक अध्यापिका ने ‘आप’ को वोटों डालने के लिए स्टेजों से ऐलान किया था कि ‘आप’ पार्टी की सरकार बनने बाद में अध्यापकों की तनख्वाहें बढ़ जाएंगी परन्तु तनख्वाहें नहीं बढ़ी। इसलिए उसने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी मांग है कि उनका इस्तीफा स्वीकार न किया जाए और उनकी तनख्वाहें बढ़ाईं जाएं। नहीं तो उनकी तरफ से खुले तौर पर पूरे पंजाब में संघर्ष शुरू किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस मौके गुरजीत सिंह उग्गोके और सर्बजीत कौर आदि के अलावा भारी संख्या में अध्यापक उपस्थित थे।

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ई.टी.टी. अध्यापकों ने फिर से लगाया शिक्षा मंत्री की कोठी आगे धरना
ई.टी.टी. अध्यापकों ने फिर से शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर की कोठी आगे अनिश्चित समय के लिए धरना लगा दिया है। अध्यापकों ने सरकार खिलाफ वादा खिलाफी करने का भी दोष लगाया। बातचीत करते अध्यापक नेता मुनीष कुमार ने कहा कि 2021 में हुई ट्रांसफर शिक्षा विभाग की तरफ से लागू नहीं की जा रही, जिसके विरोध में वह पिछले दिनों शिक्षा मंत्री की कोठी आगे अनिश्चित समय के लिए धरना लगाया था परन्तु उन्हें यह कह कर धरना उठवा दिया था कि आपकी सभी मांगें मान ली गई हैं। सोमवार को इस सम्बन्धित पत्र भी जारी करवाया जाएगा। समोवार को पत्र तो जारी हुआ परन्तु उनकी मांगें सिर्फ 10 प्रतिशत ही मानी गई। 6 अप्रैल को हुई मीटिंग का भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला जिसके रोष के तौर पर आज उन्हें फिर से अनिश्चित समय के लिए धरना लगाना पड़ा।

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अपनी सेफ्टी के लिए कर ली बैरीकेडिंग
जिस समय अध्यापक रोष मार्च निकाल कर शिक्षा मंत्री की कोठी आगे आ रहे थे तो शिक्षा मंत्री के कोठी के दोनों रास्तों पर बैरीकेडिंग की हुई थी। इस दौरान अध्यापकों ने पुलिस अध्यापकों के साथ बातचीत भी की। अध्यापकों का कहना था कि शिक्षा मंत्री ने अपनी सुरक्षा के लिए बैरीकेडिंग करवा लिए, इसका उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ना। वे उनकी कोठी आगे अनिश्चित समय के लिए बैठे रहेंगे। 

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