Edited By Kalash,Updated: 25 Mar, 2026 11:54 AM

पंजाब में अवैध माइनिंग का मुद्दा अब एक बड़े घोटाले का रूप लेता जा रहा है।
जालंधर/बिलगा (पाली): पंजाब में अवैध माइनिंग का मुद्दा अब एक बड़े घोटाले का रूप लेता जा रहा है। सरकार के सख्त आदेश और पर्यावरण संरक्षण के दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। सतलुज दरिया के किनारों पर हो रही गतिविधियां न सिर्फ कानून की खुली अवहेलना हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण भी हैं। गांव संगोजला के समाजसेवी गुरजीत सिंह द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) को भेजी गई विस्तृत शिकायत ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एन.जी.टी. द्वारा पंजाब में 85 डी-सिल्टिंग साइटों पर लगाई गई रोक के बावजूद गांव सधारा और संगोवाल में अवैध माइनिंग बेरोक-टोक जारी है।
शिकायत के अनुसार माइनिंग विभाग की कथित मिलीभगत से एक्सप्रेस मार्ग का निर्माण कर रही कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर रेत की खुदाई की जा रही है। रोजाना करीब 700 टिप्पर और 10 से अधिक पोकलेन मशीनों के जरिए सतलुज दरिया का दोहन किया जा रहा है। यह काम दिन-रात जारी है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां माइनिंग हो रही है, वहां न तो कोई स्वीकृत डी-सिल्टिंग साइट है, न कोई खसरा नंबर दर्ज है और न ही जमीन मालिकों की अनुमति ली गई है। इसका सीधा मतलब है कि यह पूरा काम पूरी तरह अवैध है और बेखौफ तरीके से चल रहा है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे मामले में सिर्फ निचले स्तर के अधिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारी भी कथित रूप से शामिल हैं। राजनीतिक नेताओं और माइनिंग एवं ड्रेनेज विभाग के अफसरों पर भी सवाल उठ रहे हैं। गुरजीत सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे यह साफ होता है कि या तो प्रशासन पूरी तरह विफल है या फिर यह पूरा खेल उनकी मिलीभगत से चल रहा है।
शिकायतकत्ता ने एन.जी.टी. से मांग की कि इस मामले का तुरंत स्वतः संज्ञान लिया जाए और एक उच्च स्तरीय टीम भेजकर गांव सधारा और संगोवाल में मौके पर जांच करवाई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए और सरकारी नुकसान की भरपाई भी उनसे करवाई जाए। उन्होंने कहा कि इलाके के लोगों में अवैध माइनिंग को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि अगर अब भी सरकार ने सख्ती नहीं दिखाई तो सतलुज दरिया का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। अब सबकी नजरें एन.जी.टी. पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है। अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ हो जाएगा कि रेत माफिया के आगे सरकार और प्रशासन दोनों बेबस हैं।
माइनिंग विभाग की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया, पोकलेन मशीन जब्त
जे.ई.-कम-माइनिंग इंस्पेक्टर हरदीप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि सूचना मिली थी कि नेशनल हाईवे का काम कर रही कंपनी के कर्मचारी दरिया से अवैध रूप से रेत निकाल रहे हैं। जब वह मौके पर पहुंचे तो वहां एक पोकलेन मशीन से रेत की खुदाई हो रही थी। विभाग को देखते ही मशीन चालक मौके से फरार हो गया।पुलिस ने उक्त पोकलेन मशीन को कब्जे में लेकर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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