अमृतसर में शिक्षा विभाग बेसहारा! 700 से ज्यादा स्कूलों की जिम्मेदारी! कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

Edited By Urmila,Updated: 13 Jul, 2026 01:26 PM

questions raised regarding the functioning of the education department in amrits

जिला अमृतसर में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक प्रणाली एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

अमृतसर (दलजीत) : जिला अमृतसर में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक प्रणाली एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जिला शिक्षा अधिकारी (सैकेंडरी) की महत्वपूर्ण कुर्सी पिछले एक माह से अधिक समय से खाली पड़ी होने के कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद भी इस पद पर किसी अधिकारी की पक्के तौर पर नियुक्ति नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी (सैकेंडरी) के रूप में तैनात रहे राजेश शर्मा का तबादला गुरदासपुर कर दिया गया था। उनके तबादले को एक महीना 10 दिन से अधिक का समय हो चुका है लेकिन विभाग द्वारा अभी तक कोई स्थायी विकल्प नियुक्त नहीं किया गया है। इस बीच विभाग द्वारा काम चलाऊ व्यवस्था के तहत जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमैंटरी) कंवलजीत सिंह को अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया है।

दोहरा चार्ज बना मुश्किल, कामकाज पर पड़ रहा असर

सूत्रों के मुताबिक डी.ई.ओ. एलिमैंटरी के पद पर पहले से ही बड़ी जिम्मेदारी होती है। जिले में 700 से अधिक एलिमैंटरी स्कूलों की देखभाल, शिक्षकों के मामले और अन्य दफ्तर के कामों के कारण यह पद पहले ही बहुत व्यस्त माना जाता है। इस पर सैकेंडरी शिक्षा का अतिरिक्त चार्ज देने से कामकाज की गति प्रभावित होने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।

दूसरी तरफ डी.ई.ओ. (सैकेंडरी) का पद भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। जिले के 700 से अधिक सैकेंडरी और सीनियर सैकेंडरी स्कूल इस अधिकारी के अधीन आते हैं। इसलिए इस पद पर पूर्णकालिक अधिकारी की अनुपस्थिति शिक्षा प्रणाली के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

डिप्टी डी.ई.ओ. के भरोसे चल रहा काम

विभाग द्वारा काम चलाने के लिए डिप्टी डी.ई.ओ. राजेश खन्ना को भी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं लेकिन मुख्य अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कई महत्वपूर्ण फाइलें और नीतिगत फैसले लटकने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

ईमानदार अधिकारी की कमी

राजेश शर्मा को एक मेहनती और ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता था। उनके तबादले के बाद विभाग में नेतृत्व की कमी साफ महसूस की जा रही है। शिक्षक वर्ग और शिक्षा से जुड़े लोगों में भी इस बात को लेकर नाराजगी पाई जा रही है कि अभी तक स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है।

शिक्षा प्रणाली पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पद पर नियुक्ति न की गई तो शिक्षा प्रणाली पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। स्कूलों की निगरानी, परीक्षाओं की तैयारी और शिक्षकों से संबंधित मामले समय पर हल न होने का खतरा बढ़ रहा है।

विभागीय चुप्पी ने बढ़ाए सवाल

इस पूरे मामले पर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। विभाग की यह चुप्पी और भी सवाल खड़े कर रही है कि आखिरकार इतने महत्वपूर्ण पद को भरने में देरी क्यों की जा रही है।

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