क्या आज खत्म होगा पंजाब कांग्रेस का अंदरूनी कलह? राज्य में बढ़ी सियासी हलचल

Edited By Vatika,Updated: 11 Jul, 2026 09:48 AM

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पंजाब कांग्रेस में पिछले करीब दो सप्ताह से चल रहे अंदरूनी घमासान के बीच आज का दिन बेहद

पंजाब डेस्कः पंजाब कांग्रेस में पिछले करीब दो सप्ताह से चल रहे अंदरूनी घमासान के बीच आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुट के बीच होने वाली बैठक को पार्टी के भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस का अंदरूनी विवाद खत्म हो जाएगा या फिर सियासी तनाव और बढ़ेगा?

पार्टी हाईकमान की बढ़ी चिंता
संगठनात्मक नियुक्तियों की सूची जारी होने के बाद पंजाब कांग्रेस में जिस तरह की नाराजगी सामने आई, उसने पार्टी हाईकमान की चिंता बढ़ा दी। हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को उनके पदों पर बरकरार रखा, जबकि अन्य कई पदों पर बदलाव किए गए। इसके बाद पार्टी के एक वर्ग ने खुलकर असंतोष जताया और लगातार बैठकों का दौर शुरू हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने शुरुआत में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन उनके आवास पर लगातार वरिष्ठ नेताओं की बैठकें होती रहीं। इन बैठकों में पूर्व विधायकों, हलका प्रभारियों, चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों और कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि पार्टी का एक बड़ा वर्ग अपनी बात हाईकमान तक पहुंचाना चाहता है। इसी दौरान पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंचे और उन्होंने लगातार मैराथन बैठकों का दौर शुरू किया। नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात्रि भोज के दौरान अलग-अलग नेताओं से मुलाकात कर पार्टी में व्याप्त असंतोष को दूर करने की कोशिश की गई। हालांकि, चन्नी गुट लगातार इन बैठकों से दूरी बनाए रहा, जिससे यह संकेत मिलता रहा कि पार्टी के भीतर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।

हाईकमान का फैसला नहीं बदलेगा
भूपेश बघेल ने अपने दौरे के दौरान कई बार स्पष्ट किया कि हाईकमान का फैसला नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि नेतृत्व कोई 'गुड़्डे-गुड़ियों का खेल' नहीं है और जिन नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं, वे अपने पदों पर बने रहेंगे। उनके इस बयान को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों का सीधा जवाब माना गया। इसके बावजूद चन्नी गुट अपने रुख पर कायम रहा। जानकारी के अनुसार, भूपेश बघेल से मुलाकात के लिए चन्नी गुट की ओर से दो शर्तें रखी गईं। पहली, बैठक पंजाब कांग्रेस कार्यालय में नहीं होगी और दूसरी, राजा वड़िंग की मौजूदगी में बैठक नहीं की जाएगी। इन शर्तों से साफ संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर मतभेद केवल पदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपसी भरोसे का संकट भी गहराता नजर आ रहा है।

2027 के चुनावों के लिए पार्टी की एकजुटता सबसे बड़ी प्राथमिकता
दिलचस्प बात यह है कि राजा वड़िंग ने पूरे विवाद में टकराव की बजाय सहमति का रास्ता अपनाने की कोशिश की। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि यदि साथियों को मनाने के लिए जरूरत पड़ी तो वह नंगे पांव भी जाने को तैयार हैं। उनका कहना था कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की एकजुटता सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। आज होने वाली बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पहली बार चन्नी गुट सीधे भूपेश बघेल के सामने अपना पक्ष रखेगा। माना जा रहा है कि इस बैठक में पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति, संगठनात्मक ढांचे, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर खुलकर चर्चा हो सकती है। चन्नी गुट की ओर से यह तर्क रखा जा सकता है कि पंजाब की जमीनी हकीकत और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को हाईकमान तक सही तरीके से पहुंचाया जाना चाहिए।


 

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