Flood Alert : सांसद चन्नी लापता! जालंधर में मची हाहाकार, खूब वायरल हो रही Video

Edited By Urmila,Updated: 06 Sep, 2025 02:06 PM

mp channi missing in jalandhar

जालंधर संसदीय क्षेत्र के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों राजनीतिक और जनभावनाओं के घेरे में हैं।

जालंधर (चोपड़ा): जालंधर संसदीय क्षेत्र के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों राजनीतिक और जनभावनाओं के घेरे में हैं। हालात यह हैं कि क्षेत्र की जनता उन्हें "लापता सांसद" कहकर पुकार रही है। वजह साफ है कि जालंधर के शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं। शहर में भी बाढ़ जैसे हालात बने रहे, सैंकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लोग सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, मगर उनके सांसद खुद कहीं और अपनी सक्रियता दिखाते नजर आते हैं। आम जनता में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर जिस जनता ने 2024 में उन्हें रिकॉर्ड मतों से जीताकर लोकसभा भेजा, उस जनता की सुध लेने में चन्नी पीछे क्यों हैं?

यूं तो चरणजीत चन्नी का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों से घिरा रहा है। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले चन्नी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में चमकौर साहिब और भदौर से एक साथ चुनाव लड़ा, मगर दोनों ही जगह हार का सामना करना पड़ा। जनता ने उन्हें सिरे से नकार साफ संदेश दिया कि मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी कार्यशैली पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

इन हालातों के चन्नी का चमकौर साहिब हलके से लगाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि हाल के दिनों में वे लगातार उसी हलके में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बोरियों में मिट्टी भरते, ट्रैक्टर चलाते और राहत कार्यों का हिस्सा बनते नजर आते हैं। दूसरी ओर, जालंधर की जनता इसे "ड्रामा" मान रही है। लोगों का कहना है कि सांसद चन्नी को जालंधर की जनता ने जिताया, मगर वे अभी भी चमकौर साहिब से ही राजनीति चमकाने में लगे हैं।

MP Channi

मतदाताओं का कहना है कि चुनावों के दौरान चन्नी ने हर समय जनता के साथ खड़े रहने का वादा किया था, मगर आज जब जनता संकट में है तो वे नदारद हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस पदाधिकारी तक उनसे मिलने को तरस रहे हैं। वहीं जनता की नाराजगी को देखते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव (ऑर्गेनाइजेशन) कैप्टन संदीप संधू ने द्वारा हाल ही जारी किए पत्र में विशेषकर सांसद चन्नी का जिक्र किया गया और उनसे आग्रह किया गया कि वे हाईकमान के फैसले के अनुरूप अपने संसदीय क्षेत्र जालंधर में सक्रिय रहें।

यह आदेश इस बात का संकेत है कि पार्टी भी चन्नी की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यदि सांसद की यह कार्यप्रणाली जारी रही तो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जालंधर में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस किस मुंह से 9 विधानसभा हलकों में वोट मांगने जाएगी। भले ही सांसद चन्नी पत्र जारी होने के बाद विगत पिछले दिनों नकोदर व शाहकोट हलकों का हवाहवाई दौरा कर बाढ़ के हालातों में काम करने की अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर खानापूर्ति कर गए है।

चन्नी को जालंधर से मिली राजनीतिक संजीवनी, मगर फिर भी जनता से दूरी

2022 में करारी हार झेलने के बाद चन्नी का राजनीतिक करियर लगभग खत्म माना जा रहा था। मगर जून 2024 में जालंधर की जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर एक नई राजनीतिक संजीवनी दी। इस जीत ने चन्नी को फिर से राजनीतिक परिदृश्य में स्थापित किया। अब अफसोस है कि चुनाव जीतने के बाद चन्नी का जनता से रिश्ता लगातार कमजोर होता चला गया। वे कब जालंधर आते हैं और कब चले जाते हैं, कहां रहते है, इसका पता गिने-चुने लोगों को ही रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में जालंधर के विभिन्न हिस्सों में "सांसद लापता" के पोस्टर तक लगाए गए।

बाढ़ त्रासदी पर सांसद की चुप्पी

जालंधर में हाल ही में बाढ़ के हालातों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में घर गिर गए, लोग बेघर हुए और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में सांसद का फर्ज था कि वे राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते। मगर चन्नी की चुप्पी और गैरमौजूदगी ने लोगों को गहरी निराशा में डाल दिया है। जालंधर के कई ग्रामीणों के अलावा शहरी लोगों का कहना है कि यदि उनके सांसद खुद प्रभावित गांवों व शहर के क्षेत्रों में जाकर हालात देखते तो प्रशासन पर भी काम करने का दबाव बढ़ता।

जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी

जालंधर की जनता का गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा है कि उन्होंने जिस नेता को दोबारा राजनीति की मुख्यधारा में लाया, वही नेता आज उनकी तरफ पीठ फेर चुका है। एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा कि उन्होंने चन्नी साहब को अपना सांसद बनाया ताकि वे उनकी आवाज संसद तक पहुंचाएं, मगर वे तो खुद ही गायब हो गए।

फिल्लौर के एक युवक ने तंज कसते हुए कहा, सांसद को खोजने के लिए अब शायद गुमशुदगी का इश्तहार देना पड़ेगा। वहीं शहर में बारिश से प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके घर टूट गए, खेत बर्बाद हो गए, मगर सांसद साहब को यहां आने की फुर्सत नहीं। लोगों का कहना है कि जालंधर की जनता ने उन्हें जिताया, मगर वे आज मात्र चमकौर साहिब के सांसद बने बैठे है।

जालंधर कांग्रेस नेताओं में भी छाई बेचैनी

सांसद की कार्यशैली से सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी भी परेशान हैं। पार्टी नेताओं व कार्यकर्त्ताओं का कहना है कि महीनों तक वे अपने सांसद के दीदार को तरसते रहते हैं। कोई कार्यक्रम हो या आपदा, सांसद की मौजूदगी अक्सर नदारद ही रहती है। इससे कार्यकर्त्ताओं का मनोबल भी टूट रहा है। कईयों का मानना है कि यदि चन्नी ने यह रवैया जारी रखा तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किस मुंह से वोट मांगने जाएंगे, कांग्रेस को बड़ी मुश्किलें झेलनी पड़ेगी।

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