Edited By Vatika,Updated: 26 Sep, 2026 08:40 AM

महानगर के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले दिलरोज हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला
लुधियाना (राज): महानगर के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले दिलरोज हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शिमलापुरी में ढाई साल की मासूम बच्ची को पहले से खोदे गए गड्ढे में जिंदा दफन करने वाली कातिल पड़ोसन नीलम (38) की फांसी की सजा को हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि दोषी महिला को कम से कम 30 साल तक सलाखों के पीछे ही रहना होगा और इस पूरी अवधि के दौरान उसे किसी भी प्रकार की कानूनी छूट या पैरोल का लाभ नहीं मिलेगा। करीब दो साल पहले जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस वहशियाना कृत्य को समाज पर कलंक मानते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पड़ोसी के बच्चों के खिलौनों व तोहफों से उपजी थी नफरत की आग
मामले के अनुसार, शिमलापुरी इलाके में पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल हरप्रीत सिंह अपनी ढाई साल की मासूम बेटी दिलरोज कौर और परिवार के साथ रहते थे। उनके ठीक पड़ोस में 38 वर्षीय तलाकशुदा महिला नीलम अपने दो बेटों के साथ रह रही थी। दोनों परिवारों के बीच बच्चों को लेकर अक्सर छोटी-मोटी कहासुनी होती रहती थी। हेड कांस्टेबल हरप्रीत सिंह अक्सर अपनी बेटी और बच्चों के लिए नए कपड़े, महंगे खिलौने और तरह-तरह के उपहार लाया करते थे। नीलम के बच्चे भी उन चीजों को देखकर अपनी मां से वैसे ही सामान की मांग करते थे, जिन्हें आर्थिक तंगी के कारण वह पूरा नहीं कर पाती थी। इसी बात को लेकर नीलम के मन में हरप्रीत के परिवार के प्रति गहरी हीन भावना और अंधी नफरत पैदा हो गई। इस जलन की आग में उसने मासूम दिलरोज को खत्म करने की रूह कंपा देने वाली साजिश रच डाली।
पहले से खोद रखा था गड्ढा, स्कूटी पर ले जाकर मुंह में ठूंसी मिट्टी
खौफनाक घटनाक्रम 28 नवंबर 2021 का है। उस दिन मासूम दिलरोज अपने घर के बाहर खेल रही थी। साजिश के तहत नीलम ने एल्डिको के पास एक सुनसान और बंजर प्लॉट में पहले से ही एक गहरा गड्ढा खोद रखा था। मौका मिलते ही नीलम ने दिलरोज को बातों में उलझाया और अपनी एक्टिवा स्कूटी पर आगे बैठाकर सुनसान प्लॉट की ओर निकल पड़ी। मासूम को जरा भी भनक नहीं थी कि जिसे वह पड़ोसन आंटी समझ रही है, वही उसकी काल बन चुकी है। प्लॉट पर पहुंचकर नीलम ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। उसने बच्ची के मुंह में जबरन गीली मिट्टी ठूंस दी और उसे उस गड्ढे में डालकर ऊपर से मिट्टी पाट दी। सांस न ले पाने और जिंदा दफन होने के कारण मासूम दिलरोज तड़प-तड़प कर वहीं दम तोड़ गई।
दफनाने के बाद घर आकर तलाशने का किया नाटक, CCTV ने पकड़ा
हत्याकांड को अंजाम देकर शातिर नीलम सीधे अपने घर लौट आई। जब दिलरोज घर नहीं दिखी और परिजनों ने रोना-पीटना शुरू किया, तो नीलम भी अनजान बनकर पीड़ित परिवार के साथ गलियों में बच्ची को तलाशने का ढोंग करने लगी। परिजनों की सूचना पर जब पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की रिकॉर्डिंग जांची, तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। फुटेज में नीलम अपनी स्कूटी पर दिलरोज को आगे बैठाकर ले जाती हुई साफ कैद हो गई थी। पुलिस ने जब उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। नीलम की निशानदेही पर पुलिस ने गड्ढे को खोदकर बच्ची को बाहर निकाला और तुरंत डीएमसी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने हत्या (धारा 302), अपहरण (364) और साक्ष्य नष्ट करने (201) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
सेशन कोर्ट में रो-रोकर मांगी थी रहम की भीख, सुनाई गई थी फांसी
लगभग दो साल पहले लुधियाना की सेशन अदालत ने तमाम गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर नीलम को दोषी ठहराया था। अदालत ने मासूम के साथ की गई बर्बरता को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई थी। फैसला सुनते ही नीलम कोर्ट रूम में जज के सामने फूट-फूट कर रोने लगी थी और हाथ जोड़कर बोली थी—"जज साहब, प्लीज मुझे बख्श दो, मेरे भी दो छोटे बच्चे हैं।" हालांकि, उस समय अदालत ने समाज में कड़ा संदेश देने के लिए किसी भी तरह की नरमी दिखाने से साफ इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट से राहत भी और सख्त पाबंदी भी: 30 साल जेल में कटेगी जिंदगी
सेशन कोर्ट के मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ नीलम ने अपने वकीलों के जरिए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। मामले के तमाम पहलुओं पर लंबी सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को रद्द करते हुए उम्रकैद में बदल दिया। हालांकि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह सख्त शर्त जोड़ दी कि नीलम को 30 वर्ष तक अनिवार्य रूप से जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा और इस दौरान उसे किसी प्रकार की छूट या पैरोल नहीं मिलेगी। इस तरह मासूम दिलरोज की कातिल अब अपनी जिंदगी के 30 साल सलाखों के पीछे ही गुजारेगी।