Unlock Punjab: 6 महीनों बाद स्कूल खुलने पर खतरनाक रुझान आए सामने

Edited By Tania pathak,Updated: 26 Jul, 2021 07:19 PM

dangerous trends came to the fore when schools opened

पंजाब सरकार के आदेशों पर आज लगभग 6 महीनों के बाद स्कूल खोले गए। कोरोना वायरस की बीमारी कारण पिछले डेढ़ सालों से स्कूल बंद पड़े हैं। इसके बीच में कुछ महीनों के लिए स्कूल खोले गए थे...

बरनाला (विवेक सिंधवानी,गोयल): पंजाब सरकार के आदेशों पर आज लगभग 6 महीनों के बाद स्कूल खोले गए। कोरोना वायरस की बीमारी कारण पिछले डेढ़ सालों से स्कूल बंद पड़े हैं। इसके बीच में कुछ महीनों के लिए स्कूल खोले गए थे परन्तु दूसरी वेव आने के बाद फिर से स्कूल बंद कर दिए गए थे। आज स्कूल खुलने दौरान खतरनाक रुझान सामने आए। जहां प्राइवेट स्कूलों में विद्यार्थियों की हाजरी लगभग 90 प्रतिशत थी वहां सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की हाजरी सिर्फ 20 प्रतिशत थी। जिसके साथ सरकार के सर्व शिक्षा अभियान को भी भारी धक्का लगा, क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ते बच्चे ज्यादातर गरीब घरानों के बच्चे होते हैं।

लॉकडाउन दौरान यह बच्चे कोई न कोई रोजगार पर लग गए। कोई दुकान पर काम करने लग गया। कोई अपने पिता के साथ दिहाड़ी करने लग पड़ा। इस तरह कई बच्चे स्कूली शिक्षा से दूर हो गए। पंजाब केसरी की टीम ने आज अलग-अलग स्कूलों का दौरा किया तो बच्चों ने अपने अनुभव भी खुल कर प्रकट किए।

हमारे स्कूल में हाजरी रही सिर्फ 20 प्रतिशत,ज्यादातर विद्यार्थी लगे कामकाज में
बातचीत करते सरकारी हाई स्कूल लड़के के वाइस प्रिंसीपल प्रमोद कुमार ने बताया कि हमारे स्कूल में सिर्फ 20 प्रतिशत विद्यार्थी ही आए हैं। माता-पिता की सहमति भी नहीं मिल रही। हमारे स्कूल में ज्यादातर विद्यार्थी गरीब वर्ग के साथ संबंधी रखते हैं। लॉकडाऊन दौरान ज्यादातर विद्यार्थी दुकानों पर लग गए। कोई अपने पिता के साथ दिहाड़ी पर लग गए। इस कारण हमारे स्कूल में सिर्फ 20 प्रतिशत विद्यार्थी ही आए हैं,80 प्रतिशत विद्यार्थी आज स्कूल में पढ़ने नहीं आए, जोकि खतरनाक रुझान है।

लॉकडाऊन में छोटे बच्चों की पढ़ाई को ज्यादा हुआ नुक्सान
बातचीत करते जय वाटिका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रिंकी सिंह ने कहा कि लॉकडाऊन दौरान ज्यादातर छोटे बच्चों की पढ़ाई को नुक्सान हुआ। क्योंकि छोटे बच्चों ने आज स्कूलों में आना ही शुरू किया था कि लॉकडाऊन लग गया और छोटे बच्चों का बेस ही नहीं बन सका। छोटे बच्चों ने अध्यापकों से काफी कुछ सीखना था जोकि सीख नहीं सके। ऑनलाइन क्लासें भी छोटे बच्चे नहीं लगा सकते जबकि बड़े बच्चे तो ऑनलाइन क्लासे लगा रहे थे।

ऑनलाइन क्लासों दौरान अनुशासन भी पूरी तरह के साथ मैंटेन नहीं होता परन्तु अब स्कूल लग गए हैं। हमारे स्कूल में आज 90 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई करने के लिए आए हैं,जो कि खुशी की बात है। हमारी तरफ से सरकार की जारी हिदायत की पूरी तरह के साथ पालना की जा रही है और सामाजिक दूरी ,क्लासों में मास्क लगा कर रखना जरूरी किया गया है। बच्चे भी स्कूल में आ कर काफी खुशी महसूस कर रहे है।

ऑनलाइन व फिजिकल तौर पर क्लासेंं लगाने में होता है काफी फर्क
बातचीत करते जय वाटिका पब्लिक स्कूल की 1 की छात्रा गुरलीन कौर ने कहा कि आनलाइन और फिजिकल तौर पर क्लासें लगाने में काफी फर्क होता है । फिजिकल तौर पर क्लासें लगाने में यह फर्क होता है कि यदि आपके मन में कोई शंका होती है तो आप तत्काल तौर पर ही अपने अध्यापक से उस समस्या संबंधी पूछ सकते हो परन्तु ऑनलाइन क्लासें लगाते समय मुश्किल आ जाती है। आज काफी लम्बे समय के बाद स्कूल खुले हैं आज स्कूल खुलने पर खुशी महसूस हो रही है।
 

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