Edited By Kalash,Updated: 27 Sep, 2026 04:49 PM
भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा पिछले कई दिनों से लगाए जा रहे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस नोट ने...
चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा पिछले कई दिनों से लगाए जा रहे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस नोट ने कांग्रेस के पूरे नैरेटिव की सच्चाई जनता के सामने रख दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े सभी प्रमुख निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
तरुण चुघ ने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की पूर्ण आयोग की बैठक हुई। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि 24 जून 2025 को जारी विशेष गहन पुनरीक्षण का मूल आदेश तथा इसके विभिन्न चरणों की समय-सारणी पूरे आयोग की सर्वसम्मति से मंजूर हुई थी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के संबंध में 27 मई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी संज्ञान लिया गया है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र को विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की नीतियों से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। चुनाव आयोग ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यह पत्र आयोग की किसी नीतिगत विषयवस्तु या IT Division से संबंधित नहीं था, बल्कि चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित प्रशासनिक विषय था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-वितरण आदेश दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए और IT Division पर उप चुनाव आयुक्त की निगरानी कभी समाप्त नहीं हुई।
तरुण चुघ ने कहा कि अब राहुल गांधी को देश को बताना चाहिए कि जिस विषय को उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जोड़कर प्रस्तुत किया, वह स्वयं चुनाव आयोग के अनुसार न तो विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित था और न ही आयोग की किसी नीतिगत प्रक्रिया से। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच करना भी राजनीतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि Form 6 को लेकर भी कांग्रेस लगातार भ्रम फैलाती रही है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए Form 6 के साथ लगाया गया घोषणा-पत्र सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचारित और बरकरार रखा गया है। गैर-पुनरीक्षण अवधि में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रक्रिया लागू रहेगी।
तरुण चुघ ने कहा कि चुनाव आयोग ने ECINet को लेकर उठाए गए सवालों से बचने के बजाय उसकी स्वतंत्र समीक्षा का निर्णय लिया है। आयोग ने IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करते हुए समिति गठित करने और ECINet की समीक्षा करने का फैसला किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनावी संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक रिकॉर्ड पर भी विचार करना चाहिए। जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव जीतते हैं, तब वही चुनाव आयोग, वही मतदाता सूची और वही चुनावी प्रक्रिया स्वीकार्य होती है; लेकिन जब परिणाम उनके पक्ष में नहीं आता, तो कभी EVM, कभी मतदाता सूची और कभी चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए जाते हैं। लोकतंत्र में जीत और हार दोनों को स्वीकार करना पड़ता है।
तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक कमजोरियों और चुनावी पराजयों का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर नहीं फोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि केरल, तेलंगाना या अन्य राज्यों में जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तब चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जाता। फिर दूसरे राज्यों में जनादेश कांग्रेस के खिलाफ आने पर वही संस्थाएं अचानक संदिग्ध कैसे हो जाती हैं?
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने के बजाय जनता के बीच जाकर अपनी पार्टी का जनाधार मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। जनता के फैसले को स्वीकार करना लोकतंत्र की पहली शर्त है। चुनाव हारने के बाद संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना जनता के जनादेश का सम्मान नहीं है।
उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को आरोपों की राजनीति छोड़कर तथ्यों का सामना करना चाहिए। चुनाव आयोग का स्पष्ट बयान सामने है, न्यायिक प्रक्रिया का रिकॉर्ड सामने है और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर आयोग ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वह लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करेगी या हर राजनीतिक असफलता के बाद उन्हीं संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करती रहेगी।
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