बिजली संकट पर केंद्र को दोष देना बंद कर पहले अपनी नालायकी, नाकामी की जिम्मेदारी ले ‘मान सरकार’: तरुण चुग

Edited By Kalash,Updated: 13 Sep, 2026 05:15 PM

tarun chugh

भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब में गहराते बिजली संकट को लेकर भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब की जनता को 24 घंटे निर्बाध बिजली देने के बड़े-बड़े वादे किए थे

चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब में गहराते बिजली संकट को लेकर भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब की जनता को 24 घंटे निर्बाध बिजली देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज उन्हीं वादों की पोल खुल चुकी है। पंजाब में उद्योगों को 14 घंटे तक के बिजली कट का सामना करना पड़ रहा है, घरेलू उपभोक्ता परेशान हैं और किसान भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद भगवंत मान सरकार अपनी नाकामियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय हर बार की तरह केंद्र सरकार पर दोष मढ़ने में लगी हुई है।

चुग ने कहा कि ‘पॉवर प्रॉमिस’ करने वाली आपदा सरकार आज ‘पॉवर कट’ वाली सरकार बन चुकी है। पंजाब की जनता को 24 घंटे बिजली देने का वादा करने वाली सरकार आज यह बताने में असमर्थ है कि जब राज्य में बिजली की मांग बढ़ने की पूरी जानकारी पहले से थी तो पर्याप्त बिजली की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। धान का सीजन, सिंचाई की जरूरत, गर्मी और बढ़ती घरेलू तथा औद्योगिक बिजली खपत कोई अचानक पैदा हुई परिस्थितियां नहीं थीं। सरकार को इन आवश्यकताओं के अनुरूप पहले से बिजली उत्पादन, कोयले और बिजली खरीद की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

तरुण चुग ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा बिजली संकट को कोयले की कमी से जोड़कर केंद्र को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश भी तथ्यों के सामने टिकती नहीं है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय के 6 सितंबर 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 4 सितंबर तक पंजाब के अपने तीन सरकारी थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक निर्धारित मानक की जरूरत का लगभग 117 प्रतिशत था। इसके बावजूद अगस्त 2026 में इन तीनों प्लांटों का औसत उत्पादन मात्र 42 प्रतिशत रहा। यानी कोयला उपलब्ध होने के बावजूद पंजाब सरकार के अपने प्लांट अपनी क्षमता के अनुरूप बिजली पैदा नहीं कर पाए। ऐसे में पूरे बिजली संकट का दोष केंद्र के सिर मढ़ना पंजाब सरकार की जिम्मेदारी से भागने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के तीन सरकारी थर्मल प्लांटों गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर स्टेशन, लेहरा मोहब्बत; गोइंदवाल साहिब थर्मल पावर प्लांट और रोपड़ थर्मल पावर स्टेशन की कुल क्षमता 2,300 MW है। फिर भी अगस्त में इनका औसत PLF केवल 42 प्रतिशत रहना गंभीर चिंता का विषय है। दूसरी ओर पंजाब स्थित निजी क्षेत्र के नाभा पावर लिमिटेड ने इसी अवधि में लगभग 93 प्रतिशत PLF हासिल किया। जब एक ही राज्य में एक निजी प्लांट लगभग 93 प्रतिशत क्षमता पर बिजली पैदा कर सकता है और राज्य के अपने प्लांट औसतन केवल 42 प्रतिशत पर चलते हैं, तो पंजाब सरकार को अपनी उत्पादन क्षमता और प्लांट प्रबंधन पर जवाब देना होगा।

चुग ने कहा कि कोयले की उपलब्धता को लेकर भी केंद्र सरकार ने पंजाब के साथ पर्याप्त सहयोग किया है। केंद्र सरकार ने पीएसपीसीएल के अधीन आने वाली पछवारा माइन से पंजाब के प्लांटो  तक कोयला पहुंचाने की व्यवस्था को सक्षम बनाया है। ऐसे में पंजाब सरकार यह स्पष्ट करे कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करने में उसकी अपनी तैयारी कहां थी।

तरुण चुग ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने कोयला उपलब्ध कराया, पंजाब के सरकारी प्लांटों में 117 प्रतिशत कोयला मौजूद है और एक निजी प्लांट 93 प्रतिशत उत्पादन पर चल रहा है, तो भगवंत मान सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर पंजाब के अपने सरकारी बिजली संयंत्र केवल 42 प्रतिशत उत्पादन पर क्यों चल रहे हैं? तकनीकी खराबियों के कारण उत्पादन इकाइयां बंद क्यों हैं? समय पर रखरखाव क्यों नहीं किया गया? बढ़ती बिजली मांग के बावजूद पर्याप्त तयारी क्यों नहीं की गई? और जब संकट सामने आया तो मान सरकार ने पहले से उपलब्ध संसाधनों का पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं किया?

चुग ने कहा कि पंजाब सरकार को यह समझना होगा कि पंजाब की जनता ने AAP को सरकार चलाने का जनादेश दिया है, बहाने बनाने का लाइसेंस नहीं। केंद्र पर आरोप लगाने से न उद्योगों की मशीनें चलेंगी, न किसानों के ट्यूबवेल और न ही आम लोगों के घरों में बिजली पहुंचेगी। पंजाब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हर उपलब्ध स्रोत से बिजली की व्यवस्था करे, बंद पड़ी उत्पादन इकाइयों को तत्काल चालू करे, कोयले का समय पर उठाव सुनिश्चित करे और बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तत्काल एवं दीर्घकालिक योजना लागू करे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पंजाब की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार सहयोग दिया है। यदि पंजाब सरकार को केंद्र से मिलने वाली बिजली में कमी की कोई वास्तविक समस्या है तो उसे पूरे तथ्य और आंकड़ों के साथ केंद्र के सामने रखना चाहिए। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से समस्या का समाधान होना चाहिए। लेकिन केंद्र पर आरोप लगाकर अपनी उत्पादन क्षमता, सहित अपनी तमाम कमियों को छिपाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।

तरुण चुग ने कहा कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल को पंजाब की जनता को जवाब देना होगा कि 24 घंटे बिजली देने के उनके चुनावी वादे का क्या हुआ। जनता ने ‘बिजली फ्री और 24 घंटे’ का वादा सुना था, लेकिन आज हकीकत ‘पॉवर कट, पॉवर क्राइसिस और सिर्फ बहाने बन चुकी है।

चुग ने पंजाब सरकार से मांग की कि वह तत्काल बिजली संकट पर श्वेत पत्र जारी करे और राज्य की कुल उपलब्ध उत्पादन क्षमता, सरकारी थर्मल प्लांटों का उत्पादन, कोयले का स्टॉक, कोल् इंडिया से हुई पेशकश और उसका उठाव, निजी थर्मल प्लांटों की स्थिति, बिजली खरीद तथा केंद्र से मिलने वाली बिजली का पूरा विवरण सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति चाहिए।

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