Edited By Subhash Kapoor,Updated: 11 Sep, 2026 09:55 PM

भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं गुजरात भाजपा प्रभारी तरुण चुग ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की DA/DR मामले में की गई कड़ी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी ने भगवंत मान सरकार की टालमटोल और अपने ही कानूनी मामले को...
चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं गुजरात भाजपा प्रभारी तरुण चुग ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की DA/DR मामले में की गई कड़ी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी ने भगवंत मान सरकार की टालमटोल और अपने ही कानूनी मामले को गंभीरता से आगे न बढ़ाने की नीति को बेनकाब कर दिया है।
चुग ने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब सरकार को 3 अगस्त के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह अपनी अपील को लंबित रखकर हाईकोर्ट के आदेश को अनिश्चितकाल तक अधर में नहीं रख सकती। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका की कमियों को अभी तक दूर क्यों नहीं किया और उसे मामले को शीघ्र आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम से मान सरकार की कार्यप्रणाली स्पष्ट हो जाती है। 3 अगस्त को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और PSPCL को लंबित DA/DR की सभी किस्तें केंद्र सरकार के अनुरूप दरों पर जारी करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने आदेश की पालना के साथ बकाया राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज का भी प्रावधान किया था।
चुग ने कहा, “किसी फैसले के खिलाफ अपील करना कानूनी अधिकार है, लेकिन लंबित और दोषपूर्ण अपील की आड़ में आदेश के पालन में देरी करना कोई अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने स्वयं यह अंतर स्पष्ट कर दिया है। मान सरकार को अब कानूनी दांव-पेंच और बहानेबाजी बंद करके सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका की कमियां दूर करनी चाहिए, मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए आगे बढ़ाना चाहिए और पंजाब के कर्मचारियों एवं पेंशनरों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।”
चुग ने कहा कि पंजाब के कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से अपने वैध DA और DR के बकाये की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि मान सरकार बार-बार आर्थिक स्थिति का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी खातों का विषय नहीं है, बल्कि उन कर्मचारियों के मेहनत से अर्जित अधिकारों का सवाल है जिन्होंने दशकों तक पंजाब की सेवा की है।
उन्होंने कहा, “मान सरकार को समझना चाहिए कि कर्मचारी और पेंशनर कोई राजनीतिक वोट बैंक नहीं हैं। उनका DA उनका वैध अधिकार है। सरकार को अपने ही कर्मचारियों से लड़ना बंद करना चाहिए और उनके अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए जो कर्मचारियों को उनका हक दे, न कि ऐसी सरकार जो मुकदमेबाजी की आड़ में उन्हें इंतजार करवाती रहे।”