‘सियासी पाखंड कर रही AAP’, 1984 के मुद्दे पर तरुण चुघ का केजरीवाल पर बड़ा हमला

Edited By Vatika,Updated: 02 Sep, 2026 05:46 PM

tarun chugh launches scathing attack on kejriwal over 1984 issue

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब की जनता के सामने AAP का असली चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब की जनता के सामने AAP का असली चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। 1984 के सिख नरसंहार के नाम पर राजनीतिक ड्रामा करने वाली AAP ने अपने ही घोषणापत्र में पीड़ित परिवारों से किए वादे पूरे नहीं किए, वहीं ED की जांच में सामने आए गंभीर आरोपों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। दूसरी ओर, लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA के भुगतान से भी भगवंत मान सरकार भाग रही है। पंजाब अब AAP की बयानबाजी नहीं, उसका हिसाब मांग रहा है।

तरुण चुग ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को 1984 के नाम पर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन करने से पहले अपने 2017 के घोषणापत्र का जवाब देना चाहिए। AAP ने 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के पीड़ित परिवारों को ₹5 लाख, सस्ते घर और सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। आज सत्ता में आए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार अपने हक के लिए भटक रहे हैं। जिस पार्टी ने वोट लेने के लिए उनके दर्द को अपने घोषणापत्र में जगह दी, वही सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल गई। यही नहीं, जब पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलने पहुंचे तो उन्हें सहानुभूति के बजाय पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने 1984 के पीड़ितों को केवल आश्वासन नहीं दिया, बल्कि 30 साल बाद धूल खा रही फाइलों को कोर्ट तक पहुंचाया, SIT का गठन किया, बंद पड़े मामलों को दोबारा खुलवाया और न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। दोषियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाया गया। पीड़ित परिवारों को वह आर्थिक सहायता दी गई जो उन्हें दशकों पहले मिल जानी चाहिए थी और रोजगार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई। सरकार के अनुसार 3,465 नौकरियां पीड़ित परिवारों को दी गईं। इनमें दिल्ली की राज्य सरकार द्वारा 36, केंद्र सरकार द्वारा 338 और हरियाणा सरकार द्वारा 121 नियुक्तियां शामिल हैं। यही अंतर है भाजपा की न्याय और पुनर्वास की राजनीति और AAP के खोखले वादों के बीच।

तरुण चुग ने कहा कि ED की जांच ने AAP के तथाकथित ‘कट्टर ईमानदारी’ के दावे की भी पोल खोल दी है। ED के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के माध्यम से तबादलों और पोस्टिंग, सरकारी फाइलों और प्रशासनिक फैसलों में कथित प्रभाव का नेटवर्क चलाए जाने से संबंधित सामग्री सामने आई है। जांच के दौरान नितिन गोहल के परिसर से ₹20.98 लाख की अघोषित नकदी जब्त किए जाने तथा WhatsApp चैट और कथित सरकारी दस्तावेजों से जुड़ी सामग्री का भी उल्लेख किया गया है। ये आरोप बेहद गंभीर हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब चुप्पी तोड़कर पंजाब की जनता को जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इससे भी बड़ा सवाल पंजाब पुलिस के रवैये पर है। ED द्वारा जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पंजाब पुलिस FIR दर्ज करने के बजाय अतिरिक्त रिकॉर्ड और मूल डेटा मांगती रही। ED ने 31 अगस्त के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर कानून के अनुसार FIR दर्ज की जानी चाहिए। 24 जुलाई को DGP को FIR के संबंध में पत्र भेजा गया था और 3 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई से पहले कार्रवाई की मांग भी की गई। भाजपा की मांग है कि पंजाब पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में काम न करे और मामले की निष्पक्ष जांच कराए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े किसी भी व्यक्ति सहित हर दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

तरुण चुग ने कहा कि पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का लगभग ₹14,191 करोड़ का लंबित DA भी भगवंत मान सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारियों को उनका हक देने के बजाय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। फरवरी 2025 में कैबिनेट ने बकाये को पांच वित्तीय वर्षों में चरणबद्ध तरीके से चुकाने की योजना को मंजूरी दी थी, लेकिन आज भी कर्मचारी अपने वैध अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 27 अगस्त को तीन लाख से अधिक कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल सरकार और कर्मचारियों के बीच टूट चुके भरोसे का स्पष्ट संकेत है।

उन्होंने कहा कि AAP सरकार के पास राजनीतिक प्रचार और विज्ञापनों के लिए पैसा है, लेकिन अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का वैध DA देने के लिए नहीं। कर्मचारियों के आंदोलन का समाधान निकालने के बजाय सरकार उन्हें नोटिस दे रही है और अब अदालतों में मामला खींच रही है। भाजपा की मांग है कि भगवंत मान सरकार DA और एरियर के भुगतान के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध रोडमैप जारी करे। पंजाब के कर्मचारी सरकार से कोई खैरात नहीं मांग रहे, वे अपना मेहनत से अर्जित और वैध हक मांग रहे हैं।

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