Edited By Kamini,Updated: 25 Sep, 2026 03:51 PM

चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस का जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला है। पंजाब कांग्रेस की तरफ से चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया।
पंजाब डेस्क: चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस का जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला है। पंजाब कांग्रेस की तरफ से चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। पंजाब के अलग-अलग जिलों से कांग्रेस नेता और वर्कर सेक्टर-17 में RBI ऑफिस के पास ग्राउंड में इकट्ठा हुए।
पंजाब कांग्रेस ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया है। चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस इन मुद्दों पर लगातार इलेक्शन कमीशन पर निशाना साध रही है। पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज सचिन पायलट इस विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए, जिनके आने की पहले उम्मीद थी। विरोध प्रदर्शन के दौरान राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, MP चरणजीत सिंह चन्नी, परगट सिंह और राज कुमार वेरका समेत कई नेता मौजूद थे।

राजा वड़िंग समेत कई कांग्रेस नेता हिरासत में लिए गए
इस बीच, चुनाव आयोग ऑफिस का घेराव करने जा रहे राजा वड़िंग समेत कई कांग्रेस नेताओं और वर्करों को हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस वर्करों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। ऑफिस का घेराव करने जा रहे कांग्रेस वर्करों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक लिया, जिसके बाद पुलिस वालों के साथ धक्का-मुक्की हुई। हिरासत का विरोध करते हुए राजा वड़िंग बस की छत पर चढ़ गए और नारे लगाए। जब वह बस से उतारे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और चंडीगढ़ सेक्टर-17 पुलिस स्टेशन ले गई। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें कीं।
विधानसभा तक SIR की कार्रवाई रोकी जाए
इस मौके पर राजा वड़िंग ने वोटर रोल की SIR पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए मौजूदा वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराए जाएं और किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए। नए फॉर्म-6 की मुश्किलों की वजह से कई पहली बार वोट देने वाले एलिजिबल वोटर अपना नाम रजिस्टर नहीं करा पा रहे हैं। SIR के मौजूदा तरीके से लाखों वोटरों के नाम हटने की संभावना है। उन्होंने कहा कि चुनाव से कुछ महीने पहले वोटरों के नाम हटाने से चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। विधानसभा चुनाव के बाद तक SIR पर रोक लगाई जाए और चुनाव के बाद इसे ट्रांसपेरेंट तरीके से कराया जाए।
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