सिविल अस्पताल में महिला के साथ मौज-मस्ती कर रहा था कर्मचारी, ऐसे हुआ रफूचक्कर

Edited By Sunita sarangal,Updated: 25 Feb, 2020 01:09 PM

staff caught with woman in decaying room of civil hospital

जालंधर के सिविल अस्पताल में खस्ताहाल कमरे में महिला और एक कर्मचारी का मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है।

जालंधर(शौरी): जालंधर के सिविल अस्पताल में खस्ताहाल कमरे में महिला और एक कर्मचारी का मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल सिविल अस्पताल के डैथ हाउस के नजदीक ही बनी बिलडिंग को 'हाउस जॉब होस्टल' कहा जाता है। इसमें अस्पताल में प्रेक्टिस करने आने वाले डाक्टरों के लिए कमरे बनाए गए थे जिससे वह यहां रह कर मौके पर ही मरीजों का इलाज कर सकें। धीरे-धीरे इस बिलडिंग में डाक्टरों ने रहना बंद कर दिया और अब अस्पताल में काम करने वाले एक कर्मचारी को पक्के तौर पर कमरा दिया हुआ है।

रविवार दोपहर के समय इस कमरे में अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारी और एक महिला का बंद कमरे में मिलना चर्चा का विषय बन चुका है। पूरे अस्पताल में इस बात की चर्चा जोर-शोर से है कि कर्मचारी महिला के साथ कमरे में काफी समय तक क्या करता रहा? बताया जा रहा है कि मामले की सूचना मिलने पर वहां प्राइवेट सुरक्षा कर्मचारी पुलिस जवान भी पहुंचे। पहले तो व्यक्ति महिला को अपना रिश्तेदार बताने लगा और इसी दौरान महिला को बाहर निकाल कर कमरे को ताला लगा मौके से फरार हो गया। अस्पताल के सूत्रों की मानें तो उक्त कर्मचारी महिला के साथ मौज-मस्ती कर रहा था।

खस्ताहाल बिल्डिंग में किस तरह मिल गया कमरा
देखा जाए तो इस बिल्डिंग को खस्ताहाल ऐलान किया जा चुका है और नियम मुताबिक यहां किसी को कमरा नहीं दिया जा सकता तो इस कर्मचारी पर यह मेहरबानी क्यों की गई। जिक्रयोग्य है कि पूरी बिगडिंग के कमरों को ताला लगा है क्योंकि अस्पताल प्रशासन मुताबिक बिल्डिंग खस्ताहाल हो चुकी है और यदि कल को कोई हादसा हो तो उसका कौन जिम्मेदार होगा।

प्राइवेट सुरक्षा कर्मचारियों की ड्यूटी भी सवालों के घेरे में
वैसा देखा जाए तो दर्जनों के हिसाब से अस्पताल में प्राइवेट सुरक्षा कर्मचारियों को रखा गया है, जिनकी जिम्मेदारी होती है कि अस्पताल में वह गलत काम होने से रोकें। खस्ताहाल हो चुकी बिलडिंग के दरवाजे में सुरक्षा कर्मचारियों ने ताला क्यों नहीं लगाया। उक्त बिल्डिंग के सामने ही जच्चा-बच्चा अस्पताल है और उस गेट के बाहर सुरक्षा कर्मचारी बैठे होते हैं पर लगता है कि उनकी आंखें बंद रहती हैं। अस्पताल के कार्यकारी मैडीकल सुपरिंटैंडैंट डा. चरनजीव सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी उन्हें मिल चुकी है और इसकी जांच करवाई जा रही है। इस मामले में जिसकी लापरवाही सामने आई उस पर एक्शन होगा। 

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