Edited By Urmila,Updated: 17 Mar, 2026 03:20 PM

जालंधर के सिविल अस्पताल टीबी के मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा। स्टाफ की भारी कमी और अलग टीबी वार्ड की अनुपलब्धता के कारण अस्पताल प्रशासन गंभीर मरीजों को भर्ती करने के बजाय अमृतसर रेफर कर रहा है।
जालंधर : जालंधर के सिविल अस्पताल टीबी के मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा। स्टाफ की भारी कमी और अलग टीबी वार्ड की अनुपलब्धता के कारण अस्पताल प्रशासन गंभीर मरीजों को भर्ती करने के बजाय अमृतसर रेफर कर रहा है। इससे गरीब और कमजोर वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
अस्पताल की टीबी ओपीडी में रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। इनमें कई ऐसे होते हैं, जिन्हें सांस लेने में परेशानी के चलते तत्काल भर्ती की जरूरत होती है। लेकिन टीबी के लिए अलग वार्ड न होने से उन्हें अन्य वार्डों में जगह नहीं मिल पा रही। पहले मौजूद टीबी वार्ड की जगह डायलसिस यूनिट बनाए जाने के बाद समस्या और गंभीर हो गई है।
फिलहाल टीबी के कुछ बेड मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट किए गए हैं, जिससे वहां भर्ती दूसरे मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। इसी कारण प्रशासन मरीजों को नए वार्ड में शिफ्ट करने के बजाय सीधे अमृतसर भेजने का रास्ता अपना रहा है।
मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
मकसूदां की 22 वर्षीय युवती और वरियाणा की 20 वर्षीय युवती जैसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सांस की गंभीर दिक्कत के बावजूद मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। परिजन सवाल उठा रहे हैं कि अमृतसर तक ले जाने और वहां इलाज का खर्च आखिर कौन उठाएगा।
अन्य वार्ड भी प्रभावित
सिर्फ टीबी ही नहीं, अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर और हड्डी विभाग भी स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर के कई बेड बंद पड़े हैं, जबकि हड्डी के मरीजों को मजबूरी में सर्जरी वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।
प्रशासन का पक्ष
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि एमडीआर टीबी मरीजों को संक्रमण के खतरे को देखते हुए रेफर किया जा रहा है। स्टाफ की नई तैनाती होते ही टीबी वार्ड और ट्रॉमा सेंटर दोबारा शुरू किए जाएंगे। हाल ही में कुछ नर्सों ने जॉइन किया है और आगे भी भर्ती की प्रक्रिया जारी रहने का दावा किया गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक वार्ड और स्टाफ पूरी तरह बहाल नहीं होते, तब तक टीबी मरीजों को इलाज के लिए बाहर भटकना पड़ेगा।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here