पंजाब में भाजपा के सहयोग के बिना नहीं बन पाएगी कोई भी सरकार :आर.पी. सिंह

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 17 Feb, 2022 04:46 PM

no government will be formed in punjab without bjp s cooperation r p lion

पंजाब में विधानसभा चुनावों को लेकर मचा शोर दो दिन बाद थम जाएगा और राज्य में अगली विधानसभा के गठन के लिए 20 फरवरी को चुनाव होंगे।

जालंधर (अनिल पाहवा) : पंजाब में विधानसभा चुनावों को लेकर मचा शोर दो दिन बाद थम जाएगा और राज्य में अगली विधानसभा के गठन के लिए 20 फरवरी को चुनाव होंगे। इन चुनावों में हार-जीत किसकी होगी, यह तो अभी साफ नहीं है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने दावा किया है कि पंजाब में जो भी सरकार बनेगी, उसमें भाजपा की भागीदारी जरूर होगी। यही नहीं उन्होंने शिरोमणि अकाली प्रमुख सुखबीर बादल से लेकर अरविंद केजरीवाल और पंजाब के अन्य मुद्दों पर खुलकर अपना पक्ष रखा। पेश है उनसे की गई बातचीत के अंश :

पंजाब में भाजपा के लिए कैसा है चुनावी माहौल?
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी पहली बार अपने दम-खम पर चुनाव लड़ रही है। बेशक पहले भी गठबंधन में पार्टी चुनाव लड़ती रही है, लेकिन यह पहली बार हुआ है जब शिरोमणि अकाली दल बादल के बिना पार्टी मैदान में उतरी है। यह पार्टी के लिए एक बड़ा चैलेंज है। दरअसल अकाली दल के साथ हमारा कोई गठबंधन नहीं था, बल्कि एक सामाजिक सांझ थी, ताकि राज्य में अमन-शांति रहे तथा आतंकवाद का दौर वापस न लौटे। लेकिन अब जब भाजपा शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) तथा पंजाब लोक कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है तो आज भी पार्टी का मनोरथ वही पुराना ही है। लोग अब बदलाव चाहते हैं और यह तभी संभव होगा, जब कांग्रेस और अकाली दल को सत्ता से बाहर रखा जाए।

कैप्टन की भाजपा के साथ सांझ पर उठाए जा रहे सवाल ?
कैप्टन अमरेंद्र सिंह एक सुलझे हुए नेता हैं। उन्होंने राज्य में काम किया, तो राजनीति नहीं की। राज्य के सी.एम. के तौर पर उन्होंने केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम किया और इसका फायदा भी पंजाब को होता रहा। कैप्टन तो फिर देश की एक पार्टी के साथ गठबंधन कर रहे हैं, लेकिन सवाल उठाने वाले राहुल गांधी पर क्यों कोई टिप्पणी नहीं करते, जिन्होंने चाइना की पार्टी के साथ गठबंधन कर रखा है। और हैरानी की बात है कि यह तो सब कुछ आन रिकार्ड है। कैप्टन एक राष्ट्रवादी आदमी हैं और इसी सोच के मालिक हैं कि पंजाब की तरक्की है।

सिद्धू तो कह रहे कैप्टन चला हुआ कारतूस ?
यह बात तो खुद नवजोत सिंह सिद्धू पर भी सैट बैठती है। सिद्धू को तो खुद राहुल गांधी ने खुड्डेलाइन लगा दिया है। सिद्धू की कांग्रेस पार्टी में ही कोई पूछताछ नहीं है। राहुल गांधी जिसे वो पप्पू कहते थे, उसी पप्पू ने नवजोत सिंह सिद्धू की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

अकाली दल से अलग होने का भाजपा को हुआ नुक्सान ?
सुखबीर बादल इस समय एक बड़ी गलतफहमी में हैं कि वह भाजपा के बिना सत्ता में आ जाएंगे। सुखबीर बादल ने सदा ही भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को दरकिनार करने की कोशिश की है। 2007 के चुनावों में जब भाजपा  की 19 सीटों के कारण ही गठबंधन सरकार बनी थी, उस दौर में डिप्टी सी.एम. पद पर भाजपा के नेताओं का दावा बनता था, लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने पहले मनोरंजन कालिया और फिर बाद में भगत चूनी लाल को इस पद से दूर रखा। और खुद के बेटे को डिप्टी सी.एम. बना दिया। उस समय स्व. अरुण जेतली पंजाब में एक्टिव थे तथा उन्होंने पंजाब की भलाई को सोचते हुए डिप्टी सी.एम. पद की तिलांजलि दे दी और हिंदू-सिख एकता की खातिर गठबंधन जारी रखा। तब भारतीय जनता पार्टी ने बाहर से सपोर्ट देने की भी विकल्प रखा था, लेकिन सुखबीर ने उस समय खुद ही भाजपा के लोगों को मंत्री बनाया। आज जो सुखबीर दलित डिप्टी सी.एम. के नाम पर पालटिक्स कर रहे हैं, उसी सुखबीर ने तब भगत चूनी लाल जैसे दलित चेहरे को डिप्टी सी.एम. बनने से रोक दिया था।

केजरीवाल का आरोप है कि भाजपा जातिगत राजनीति करती है ?
अरविंद केजरीवाल केवल झूठ का सहारा लेते हैं। दिल्ली माडल के नाम पर भी जिस माडल की वह बात कर रहे हैं, उसमें न तो स्कूलों का विकास हो रहा है तथा न ही लोगों को दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। मोहल्ला क्लीनिकों में बच्चों को गलत दवाइयां दी जा रही हैं। दिल्ली में एक नया पुल तक नहीं बना, दिल्ली में 177 जगह पर जलभराव रहता है, तो फिर केजरीवाल किस विकास की बात कर रहे हैं। जिन स्कूलों की वह बातें करके लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं, वे स्कूल 50 प्रतिशत अध्यापकों की गिनती के साथ काम कर रहे हैं। अगर दिल्ली के स्कूल इतने स्मार्ट हैं तो पिछले 6 साल से 9वीं क्लास के बाद ड्रापआऊट इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है। ये मेरे आंकडे नहीं बल्कि सरकारी आंकड़े बोलते हैं। शराब से ठेकेदारों को 2 प्रतिशत कमिशन मिलती थी, लेकिन केजरीवाल ने बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी। दिल्ली में 246 शराब के ठेके थे, जिन्हें बढ़ाकर 849 कर दिया गया। हर गली मोहल्ले में शराब ठेके खोल दिए गए और ठेकेदारों को खुली छूट दे दी। ठेकेदारों को जो फायदा यहां दिया गया, उसी से कमाया हुआ पैसा पंजाब के चुनावों में लग रहा है।

अगर 'आप' इतनी बुरी तो फिर चुनाव कैसे जीत जाते हैं ?
(हंसते हुए) काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती। बिजली फ्री का दावा जो केजरीवाल ने किया था वह ठुस्स हो चुका है। लोगों को मीटर रीडिंग के पैसे नहीं देने पड़ रहे, लेकिन सरचार्ज के तौर पर वसूली हो रही है। पानी फ्री किया था, लेकिन पानी आता ही नहीं। यमुना साफ की जानी थी, उसकी हालत जस की तस है। लोगों को अब केजरीवाल सरकार के बारे में जानकारी मिल चुकी है और यह गलती लोग अब दोबारा नहीं करने वाले।

केजरीवाल का दावा 70-80 सीटों का दावा कर रहे हैं?
सीटें तो वह 100 भी कहते थे, लेकिन जो भी आई, उसमें से भी बहुत से विधायक बाद में दूसरी पार्टियों में जाकर शामिल हो गए। झूठी कसमें खाते हैं और झूठ ही बोलते हैं। दरअसल केजरीवाल की नजर अब पंजाब के सी.एम. पद पर है, इसी कारण उन्होंने अपनी पत्नी को मैदान में उतारा है। सुनीता केजरीवाल भगवंत मान को देवर कह रही हैं और उनके लिए प्रचार कर रही हैं। दरअसल यह एक तरीका है लोगों में सुनीता केजरीवाल का जाना-पहचाना चेहरा बनाने का। ताकि कल को उन्हें सी.एम. पद के लिए आगे किया जा सके। भगवंत मान तो केवल एक जरिया है। अन्यथा अगर भगवंत मान पर इतना ही भरोसा था, तो केजरीवाल पहले राज्यपाल तथा नवजोत सिंह सिद्धू के साथ चर्चाएं क्यों करते रहे।

अकाली दल से अलग होने से क्या 'आप' को फायदा नहीं हुआ?
कई राज्यों में भाजपा की सरकार है और केंद्र व भाजपा की सरकारें मिलकर डबल इंजन सरकारें चला रही हैं, जिसका फायदा वहां के राज्य के लोगों को हो रहा है। पंजाब में भी अब लोग डबल इंजन सरकार चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने तैयारी कर ली है। जहां तक अकाली दल की बात है, तो अकाली दल के साथ मिलने से भाजपा को ज्यादा नुक्सान हो रहा था। पंजाब में भाजपा बेशक पहली बार इतनी सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन पार्टी के बिना पंजाब में सरकार नहीं बनने वाली। जो भी सरकार बनेगी, वह भाजपा के सहयोग से ही बन पाएगी। जहां तक मुकाबले की बात है तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल तथा आम आदमी पार्टी की पोल खुल चुकी है और लोगों के हिसाब से ये कहीं भी मैदान में नहीं हैं।

सी.एम. चन्नी कह रहे गंदी पालटिक्स कर रही भाजपा ?
पंजाब में 111 दिन की चन्नी सरकार का कार्यकाल लोगों ने देख ही लिया है। सिर्फ ऐलान किए गए और लोगों के हाथ में कुछ नहीं आया। मुझे तो सी.एम. चन्नी की सोच पर हैरानी होती है, जो यह कह रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने उनके चौपर को जान-बूझ कर रुकवाया। मैं चन्नी की जानकारी में बढ़ौतरी करते हुए बताना चाहता हूं कि चुनाव आचार संहिता लग चुकी है और चुनाव आयोग के पास ही सारा दारोमदार है, तो ऐसे में यह उनके आरोप तो बेबुनियाद हैं। लेकिन खुद चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में जो देश के प्रधानमंत्री के साथ फिरोजपुर में हुआ, उसे भूला नहीं जा सकता। दुश्मन देश की पहुंच में प्रधानमंत्री को 20 मिनट तक खड़े रखा गया और उनकी जान को खतरे में डाला गया। यह सब जानबूझ कर किया गया। यह तो शुक्र है कि एस.पी.जी. ने मामले को संभाल लिया, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

तो क्या चुनावों के बाद अकाली दल के साथ फिर होगा गठबंधन ?
भारतीय जनता पार्टी के सहयोग के बिना राज्य में सरकार नहीं बनेगी, यह तो तय है। लेकिन शिरोमणि अकाली दल को दोबारा साथ लाया जाएगा, यह संभव ही नहीं है। यह बात भी साफ है कि पंजाब में भाजपा झूठे लोगों के साथ किसी भी तरह से गठबंधन नहीं करेगी। जिन लोगों ने पंजाब के भोले-भाले लोगों से विद्रोह किया, जिन लोगों ने गुरु साहिबान की बेअदबी की, ऐसे लोगों के साथ भाजपा कभी भी गठबंधन नहीं करेगी।

 

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