Edited By Kamini,Updated: 10 Apr, 2026 12:46 PM

थाना डिवीजन नंबर 6 के एक एस.एच.ओ. द्वारा दुकानदार को नग्न कर उसके प्राइवेट पार्ट पर बिजली के झटके देने के सनसनीखेज मामले को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।
लुधियाना (राज): खाकी की बर्बरता और हिरासत में दी गई अमानवीय यातनाओं को लेकर 'पंजाब केसरी' में छपी खबर का बड़ा असर हुआ है। थाना डिवीजन नंबर 6 के एक एस.एच.ओ. द्वारा दुकानदार को नग्न कर उसके प्राइवेट पार्ट पर बिजली के झटके देने के सनसनीखेज मामले को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।
आयोग ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने आरोपी एस.एच.ओ. विजय कुमार को पहले ही लाइन हाजिर कर दिया है, लेकिन अब आयोग की दखल के बाद इस मामले में कानूनी शिकंजा और कसता नजर आ रहा है। गौरतलब है कि गत दिनों 'पंजाब केसरी' ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी कि कैसे 3 अप्रैल की रात एस.एच.ओ. विजय ने एक दुकानदार सरबजीत सिंह की दुकान पर छापेमारी की थी। पीड़ित का आरोप था कि उसकी दुकान में जबरन शराब पीने वाले व्यक्तियों के साथ पुलिस उसे भी थाने ले गई। वहां कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी ने दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए न केवल पीड़ित के कपड़े उतरवाए, बल्कि उसके नाजुक अंगों पर बिजली के झटके भी दिए। इतना ही नहीं, एस.एच.ओ. पर पीड़ित का मोबाइल और नकदी छीनने के भी गंभीर आरोप लगे थे।
मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को इस तरह बिजली के झटके देना जानलेवा साबित हो सकता है और यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। आयोग ने पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा को निर्देश दिया है कि मामले की गहन जांच कर अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही, केस के जांच अधिकारी (I.O.) को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का हुक्म सुनाया गया है।
बता दें कि पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने अनुशासनहीनता और प्रताड़ना के आरोपों को प्रारंभिक तौर पर गंभीर मानते हुए एस.एच.ओ. विजय कुमार के खिलाफ लाइन हाजिर की कार्रवाई अमल में लाई थी। अब आयोग की सख्ती के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और कयास लगाए जा रहे हैं कि आरोपी अधिकारी पर जल्द ही विभागीय जांच के साथ-साथ बड़ी गाज गिर सकती है। इस आदेश की प्रतियां स्पेशल डी.जी.पी. (मानवाधिकार) पंजाब को भी भेज दी गई हैं।
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