Edited By Vatika,Updated: 28 Sep, 2026 08:59 AM

महानगर में साइबर अपराधियों का जाल इस कदर गहराता जा रहा है कि अब बिना ओटीपी (OTP) साझा
लुधियाना (राज): महानगर में साइबर अपराधियों का जाल इस कदर गहराता जा रहा है कि अब बिना ओटीपी (OTP) साझा किए और बिना एटीएम कार्ड छुए भी खाते खाली किए जा रहे हैं। ताजा मामला शेरपुर मार्केट इलाके का सामने आया है, जहां रहने वाले एक मेहनतकश व्यक्ति कवीनाथ पंडित के बैंक खाते में शातिर साइबर ठगों ने सेंधमारी करते हुए 25,000 रुपए की नकदी साफ कर दी। वारदात की खबर पीड़ित को उस वक्त लगी जब वह रात की ड्यूटी खत्म कर सुबह घर लौटा और उसने मोबाइल पर आए बैंक संदेश देखे। पीड़ित ने तुरंत बैंक खाता ब्लॉक करवाकर पुलिस व साइबर क्राइम सेल को लिखित शिकायत सौंप इंसाफ की गुहार लगाई है।
रात को ड्यूटी पर था पीड़ित, सुबह देखा तो खाली था खाता
पीड़ित कवीनाथ पंडित ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह रात की शिफ्ट में अपनी ड्यूटी पर तैनात था। ड्यूटी के दौरान उसने अपने मोबाइल या बैंक खाते से किसी प्रकार का कोई ऑनलाइन या ऑफलाइन लेन-देन नहीं किया था। जब वह सुबह अपनी ड्यूटी खत्म करके घर लौटा और उसने रोजमर्रा की तरह अपना मोबाइल फोन चेक किया, तो बैंक की तरफ से खाते से 25,000 रुपए की राशि कटने का मैसेज देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई।
न ओटीपी दिया, न कार्ड का हुआ इस्तेमाल
कवीनाथ पंडित ने स्पष्ट रूप से बताया कि उसने किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ न तो कोई बातचीत की, न कोई संदिग्ध लिंक क्लिक किया और न ही किसी के साथ अपना गोपनीय ओटीपी साझा किया। यही नहीं, उसका एटीएम कार्ड भी सुरक्षित उसकी जेब में था और उसने किसी दूसरे व्यक्ति को कार्ड नहीं दिया था। इसके बावजूद शातिर साइबर अपराधियों ने तकनीकी सेंधमारी कर उसके खाते से मेहनत की कमाई के 25 हजार रुपये पार कर दिए। बिना किसी सत्यापन प्रक्रिया के खाते से पैसे निकलने की इस घटना ने ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैंक से संपर्क कर तुरंत ब्लॉक करवाया खाता, साइबर सेल में शिकायत
खाते से अचानक रकम गायब होने का पता चलते ही पीड़ित ने बिना कोई समय गंवाए सीधे अपने संबंधित बैंक की हेल्पलाइन व शाखा से संपर्क साधा। उसने बैंक अधिकारियों को इस संदिग्ध व अनधिकृत लेन-देन की पूरी जानकारी दी। भविष्य में खाते से कोई और अवैध निकासी न हो सके, इसके लिए एहतियात के तौर पर बैंक खाता तुरंत प्रभाव से ब्लॉक (बंद) करवा दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और उच्चाधिकारियों को मामले की शिकायत सौंपकर गुहार लगाई कि तकनीकी जांच के आधार पर ठगी गई 25,000 रुपए की रकम वापस दिलवाई जाए और इस शातिर गिरोह को बेनकाब किया जाए।