Edited By Vatika,Updated: 15 Sep, 2026 09:24 AM

दोनों मृतक शूटर जालंधर पुलिस के 20 जून 2026 के एक पुराने फायरिंग केस में वांटेड चल रहे थे।
लुधियाना (राज): मॉडल टाउन स्थित आतम पार्क के बाहर रक्तदान शिविर में विरोधी गैंग पर बड़े हमले की साजिश रचने और पुलिस मुठभेड़ में मारे गए दोनों शूटरों की शिनाख्त को लेकर एक सनसनीखेज व हैरान करने वाला तकनीकी मोड़ सामने आया है। पंजाब पुलिस के अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर (PAIS) की पहचान में हुई चूक के बाद जिसे पहले अमृतसर का संदीप सिंह मान लिया गया था, वह दरअसल जिंदा है और अपने घर पर जमानत पर मौजूद है। पुलिस की दोबारा गहन पड़ताल में यह साफ हुआ है कि मुठभेड़ में मारा गया दूसरा शूटर जालंधर के गांव ढीना का 18 वर्षीय गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी था। दोनों मृतक शूटर जालंधर पुलिस के 20 जून 2026 के एक पुराने फायरिंग केस में वांटेड चल रहे थे।
PAIS का AI फेस रिकग्निशन खा गया धोखा, जिंदा निकला संदीप
एनकाउंटर के बाद पुलिस ने दोनों अज्ञात मृतकों के चेहरों की तस्वीरें पंजाब पुलिस के डिजिटल क्रिमिनल डेटाबेस 'पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम' (PAIS) में अपलोड की थीं।सिस्टम ने एक चेहरे का मिलान अमृतसर के सुल्तानविंड निवासी करनजोत सिंह उर्फ नोनू के रूप में किया, जबकि दूसरे मृतक का मिलान अमृतसर के ही संदीप सिंह के तौर पर दिखाया। हालांकि, जब पुलिस ने संदीप का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि वह जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस टीम ने तुरंत अमृतसर पहुंचकर संदीप का फिजिकल वेरिफिकेशन किया, जहां वह घर पर जिंदा मिला। जांच में सामने आया कि मृतक गुरप्रीत गोपी का चेहरा संदीप से हूबहू मिलता-जुलता था, जिस कारण एआई एल्गोरिदम गच्चा खा गया।
जालंधर के ढीना गांव का रहने वाला था 18 वर्षीय गुरप्रीत गोपी
गलती पकड़ में आने के बाद जब पुलिस ने तकनीकी जांच का दायरा बढ़ाया, तो दूसरे मृतक की असली पहचान 18 वर्षीय गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी पुत्र बलविंदर सिंह, निवासी गांव ढीना (जालंधर) के रूप में स्थापित हुई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी और करनजोत सिंह नोनू दोनों गहरे दोस्त थे।दोनों के खिलाफ 20 जून 2026 को जालंधर के थाना डिवीजन नंबर-5 में जानलेवा फायरिंग का संगीन मामला दर्ज हुआ था।इस वारदात के बाद से ही दोनों शूटर फरार चल रहे थे और जालंधर पुलिस को उनकी तलाश थी।
शगनप्रीत ने दिया था कत्लेआम का टास्क, डोनी बल ने भेजे थे हथियार
पुलिस जांच में यह कड़ियां पूरी तरह जुड़ चुकी हैं कि दोनों शूटरों को आतम पार्क के ब्लड डोनेशन कैंप में नरसंहार करने का टास्क विदेश में बैठे गैंगस्टरों ने सौंपा था। सिद्धू मूसेवाला का पूर्व मैनेजर और बंबिहा गैंग से जुड़ा शगनप्रीत सिंह विदेश में बैठकर इस ऑपरेशन को ऑपरेट कर रहा था। उसी ने कैंप में मौजूद विरोधी गुट के प्रमुख चेहरों को गोलियों से भूनने का निर्देश दिया था। वहीं, दूसरे गैंगस्टर डोनी बल ने शूटरों तक अत्याधुनिक 9 एमएम ऑटोमैटिक पिस्तौलें पहुंचाने का बंदोबस्त किया था। पुलिस की मुस्तैदी से ऐन वक्त पर एनकाउंटर होने के कारण दर्जनों लोगों की जान बच गई।
पाकिस्तान से अमृतसर बॉर्डर के जरिए हुई थी हथियारों की तस्करी
एनकाउंटर स्थल से बरामद हथियारों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच में अंतरराष्ट्रीय स्मगलिंग का सुराग मिला है।बरामद ऑटोमैटिक हथियारों में से एक हथियार मेड इन पाकिस्तान बताया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों और पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि यह खेप ड्रोन या बॉर्डर पार तस्करों के जरिए अमृतसर के सीमावर्ती इलाकों में गिराई गई थी। वहां से स्थानीय हैंडलर्स के जरिए यह असलहा जालंधर और अमृतसर के इन दोनों नौजवान शूटरों तक पहुंचाया गया था। पुलिस कमिश्नरेट अब पाकिस्तान से चली इस अवैध हथियारों की सप्लाई चेन और लुधियाना में शूटरों को पनाह देने वाले स्थानीय संपर्कों पर शिकंजा कस रही है।