बड़ा घोटाला: गोदामों से अनाज की जाली बिलिंग का पर्दाफाश

Edited By Sunita sarangal,Updated: 08 Nov, 2021 01:30 PM

5 crores have been spent fake billing of grains from warehouses exposed

फूड सप्लाई विभाग के सरकारी गोदामों में से एक बार फिर 70 हजार के करीब अनाज की बोरियों के घोटाले के नए मामले का पर्दाफाश हुआ है। अनाज को गायब करने के लिए उसे गोदामों से चोरी नहीं किया गया...

अमृतसर (इंद्रजीत): फूड सप्लाई विभाग के सरकारी गोदामों में से एक बार फिर 70 हजार के करीब अनाज की बोरियों के घोटाले के नए मामले का पर्दाफाश हुआ है। अनाज को गायब करने के लिए उसे गोदामों से चोरी नहीं किया गया, बल्कि आधुनिक तरीके के साथ गायब हो गया। उसकी बिलिंग करवा दी थी, जिस उपरांत 2 या 3 दिन में ऑनलाइन भुगतान करने की बात की है। पंजाब सरकार की तरफ से इस मामले को लेकर विजिलेंस को जांच के निर्देश दिए और विजिलेंस की टीम मामले की जांच कर रही हैं।

इस योजनाबद्ध घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ, जब फूड सप्लाई विभाग के एक सीनियर अधिकारी और जिला कंट्रोलर को सूचना मिली कि किताबें अनाज के गोदामों में बिना पहुंचे खरीद की गई है। इसमें 2650 मीट्रिक टन यानी कि 70 हजार बोरी के करीब अनाज दिखाया गया है। सूचना पर कार्यवाही करते हुए विभाग के सीनियर अधिकारी ने गोदामों की फोटोग्राफी की तो वहां ऐसी कोई खेप दिखाई नहीं दी, जिसकी खरीद की गई हो। वहीं इंस्पेक्टरों ने माना कि उन्होंने खरीद की है। हालांकि उन्होंने इसकी मात्रा में अंतर बताया है।

इस मामले संबंधित जिला फूड सप्लाई कंट्रोलर ने पंजाब प्रदेश फूड सप्लाई सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह आई.ए.एस. को भेजी। वहां इसमें तस्वीरों के सबूत सहित ग्रुप मैसेज भी पाया गया, जिसमें गोदाम में फोटोग्राफी की गई थी। इस पर कार्यवाही करते हुए फूड सप्लाई विभाग के सचिव गुरकीरत किरपाल सिंह ने इस मामले को लेकर प्रदेश विजिलेंस चीफ सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को पत्र भेजा, जिसमें ग्राउंड स्तर में मिली रिपोर्ट का संक्षिप्त में जिक्र था। विजिलेंस चीफ को लिखे गए पत्र में फूड सप्लाई विभाग के सचिव की तरफ से स्पष्ट कहा गया है कि इस तरह का घोटाला विभागीय आधिकारियों और प्राईवेट लोगों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता। इस उपरांत बदलते घटनाक्रम में इस जांच को विजिलेंस के हवाले किया गया। विजिलेंस टीमें इस मामले की जांच में लगी हुई हैं।

इस काम में घोटाला करने वाले इतने तेज-चुस्त हैं कि जैसे ही बिलिंग कन्फर्म हो जाती है और उनका नाम पैनल में पड़ जाता है तो सिर्फ 1 या 2 दिन में पेमेंट ऑनलाइन अकाऊंट में पड़ जाती है। कुल मिलाकर इस में 3 दिन लगते हैं। कहा जा रहा है कि इस मामले में फूड स्पलाई विभाग के कंट्रोलर राज ऋषि मेहरा ने अपनी अच्छी कारगुजारी दिखाई, जिसके साथ तुरंत हलचल हुई और मामले का पर्दाफाश हुआ।

सूत्रों का मानना है कि इसमें फूड सप्लाई कंट्रोलर का एक्शन में यदि देर हो जाती है तो मामले का सीन बदल सकता था। यदि उनको एक्शन की भिनक कुछ पहले मिल जाए तो वह अपने के पास से स्टाक पूरा कर जाते हैं, जिसके साथ घोटाले का दोष स्टाक गिनने की लापरवाही तक पहुंचते हुए पहाड़ से राई ’ बन जाती है। क्योंकि उनके पास अपना ही इतना स्टाक होता है कि एक-दो लाख बोरी का जुगाड़ लगाना उनके लिए बहुत मामूली है। वहीं यदि घोटाला सफलतापूर्वक होकर इसकी रकम मिल जाए तो दोषी अधिकारी के भी गायब होने का शक अधिक हो जाता है, जिस तरह पहले जसदेव सिंह के मामले में हुआ है।

क्या कहते अधिकारी !
इस संबंध में जिला फूड सप्लाई कंट्रोलर राज ऋषि मेहरा का कहना है कि विजिलेंस विभाग इस मामले में पूरी जांच कर रहा है और जल्दी ही इसके नतीजे सामने आएंगे। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। 

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