पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा से डेनमार्क तक: एचपीवी से जुडी गलत सूचना पर शोध को मिली वैश्विक पहचान

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 10 Apr, 2026 05:20 PM

from central university of punjab bathinda to denmark

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष एवं इंटरवेंशन्स डिजाइन एंड इफेक्ट्स लैब (आई.डी.ई.एल.) के संस्थापक डॉ. रुबल कानोजिया तथा उनके पीएचडी शोधार्थी सुश्री रक्तिमा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की...

बठिंडा : पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष एवं इंटरवेंशन्स डिजाइन एंड इफेक्ट्स लैब (आई.डी.ई.एल.) के संस्थापक डॉ. रुबल कानोजिया तथा उनके पीएचडी शोधार्थी सुश्री रक्तिमा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। उनका शोध पत्र डेनमार्क के ओडेंस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न डेनमार्क में 13–15 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संचार सम्मेलन में प्रस्तुति हेतु चयनित हुआ है।

भारत में एचपीवी टीकाकरण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लागू होने के परिप्रेक्ष्य में यह शोध समाज में फैली गलत सूचनाओं को दूर करने और जागरूकता बढ़ाने के माध्यम से कैंसर की रोकथाम के प्रयासों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। “परसीव्ड बैरियर्स टू एचपीवी प्रिवेंटिव केयर अमंग सेक्सुअल एंड जेंडर माइनॉरिटीज इन इंडिया: ए क्वालिटेटिव एक्सप्लोरेशन” शीर्षक वाले इस शोध में यह उजागर किया गया है कि एचपीवी के प्रति जागरूकता की कमी, एचपीवी और उसके टीके के बारे में अपर्याप्त जानकारी, आर्थिक बाधाएं, समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता तथा जनसामान्य में फैली गलत सूचनाएं एचपीवी से बचाव में प्रमुख अवरोध हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार इन निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि गलत सूचनाओं पर प्रभावी नियंत्रण, एचपीवी और उसके टीके के प्रति सही जानकारी का प्रसार, जनजागरूकता अभियानों को सशक्त बनाना तथा स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सभी वर्गों को समावेशी और समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

इस अवसर पर सीयू पंजाब के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने डॉ. रुबल कानोजिया और सुश्री रक्तिमा गुप्ता को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि आई.डी.ई.एल. लैब से स्वास्थ्य संचार के क्षेत्र में लगातार हो रहे शोध यह दर्शाते हैं कि सामाजिक विज्ञान शोध न केवल समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकता है, बल्कि नीति-निर्माण और वैश्विक शैक्षणिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

डॉ. रुबल कानोजिया ने बताया कि आई.डी.ई.एल. लैब देश की शुरुआती प्रयोगात्मक प्रयोगशालाओं में से एक है, जो जनसंचार के क्षेत्र में रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (आरसीटी) और क्वासी-एक्सपेरिमेंटल शोध को समर्पित है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कुलपति प्रो. तिवारी के मार्गदर्शन, प्रेरणा और निरंतर सहयोग को दिया, जिनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में सशक्त शोध वातावरण विकसित हो रहा है। उनके प्रयासों से सीयू पंजाब ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

इस उपलब्धि को और मजबूती देते हुए आई.डी.ई.एल. लैब के कैंसर संबंधी गलत सूचनाओं पर किए गए हालिया शोध को भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्गत इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर द्वारा स्वीकार किया गया है। एचपीवी टीके से संबंधित गलत सूचनाओं पर यह शोध भी विश्वविद्यालय के लिए एक और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि है।

आई.डी.ई.एल. लैब के अन्य सदस्यों सुश्री ऋतु आर्या (एसआरएफ), नमन घनघस, रॉबिन जिंदल, रगेंदु आर. एवं  अमित शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता मजबूत शोध संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने जनस्वास्थ्य संचार के क्षेत्र में गलत सूचनाओं को दूर करने, प्रभावी हस्तक्षेप विकसित करने और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह उपलब्धि सी यू पंजाब के जनसंचार एवं मीडिया अध्ययन विभाग की बढ़ती शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैश्विक शोध सहभागिता को भी दर्शाती है।
 

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