Edited By Vatika,Updated: 16 Jan, 2026 12:47 PM

एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज टीचर्स (पंजाब व चंडीगढ़) ने पंजाब सरकार पर गंभीर
लुधियाना (विक्की): एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज टीचर्स (पंजाब व चंडीगढ़) ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट आने के 13 महीने बाद भी अयोग्य प्रिंसिपलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। संगठन ने मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान और उच्च शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस को इस संबंध में कई पत्र लिखे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जारी बयान में संगठन के अध्यक्ष प्रो. तरुण घई और महासचिव प्रो. जसपाल सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने 18.08.2022 को राज्य के विभिन्न कॉलेजों के 8 अयोग्य प्रिंसिपलों के खिलाफ जांच शुरू की थी। इस जांच रिपोर्ट को प्रो. तरुण घई ने RTI के माध्यम से हासिल करने के बाद 8 दिसंबर 2024 को सार्वजनिक किया था। इसके बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। संगठन का कहना है कि पहले शिक्षा मंत्री को फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट भेजकर जल्द कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन जब मंत्री हरजोत बैंस की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया तो मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी कई बार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही यह भी मांग की गई कि इतने बड़े खुलासे के बाद भी अगर मंत्री कार्रवाई नहीं करते तो उनका इस्तीफा लिया जाए।
AUCT ने आरोप लगाया कि अयोग्य प्रिंसिपलों के मामले में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा होने के बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। संगठन ने सवाल उठाया कि जो मुख्यमंत्री अपनी ही सरकार की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं करता, उससे आम जनता की शिकायतों पर न्याय की क्या उम्मीद की जा सकती है। प्रो. तरुण घई ने कहा कि अयोग्य प्रिंसिपलों को संरक्षण देना न केवल UGC गाइडलाइंस 2010 बल्कि पंजाब सरकार के 30.07.2013 के नोटिफिकेशन का भी उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि इन्हीं नियमों के तहत पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने 04.12.2023 को जी.एच.जी. खालसा कॉलेज, गुरूसर सुधार (लुधियाना) के एक अयोग्य प्रिंसिपल की मंजूरी रद्द कर दी थी, जो जांच के दायरे में आए 8 प्रिंसिपलों में से एक था। अंत में संगठन ने “शिक्षा क्रांति” का नारा देने वाली भगवंत मान सरकार से अपील की कि अयोग्य प्रिंसिपलों को तुरंत कॉलेजों से हटाया जाए, उनसे करोड़ों रुपये की रिकवरी की जाए और पंजाब सरकार के खजाने को हुए नुकसान की भरपाई की जाए।