Edited By Vatika,Updated: 08 Aug, 2026 02:18 PM

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद अकाली दल की राजनीतिक गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं। इसी कड़ी में सुखबीर सिंह बादल ने तत्काल प्रभाव से पार्टी के सांसदों, पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारियों की अहम बैठक बुलाई है। राजधानी चंडीगढ़ में होने वाली इस बैठक को आने वाली पंजाब की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुखबीर बादल की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, पार्टी की अगली रणनीति और आगामी चुनावों को लेकर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि अकाली दल ने प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया था, लेकिन इसके तुरंत बाद बुलाई गई बड़ी बैठक ने गठबंधन की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी गठबंधन की चर्चा
दरअसल, सुखबीर सिंह बादल ने संसद पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच कई मिनट तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद सुखबीर बादल ने इसे शिष्टाचार भेंट बताते हुए कहा था कि पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को सिर्फ शिष्टाचार भेंट तक सीमित नहीं माना जा रहा। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अकाली दल और भाजपा के बीच दोबारा गठबंधन को लेकर गंभीर स्तर पर बातचीत शुरू हो गई है? अगर दोनों पार्टियां दोबारा साथ आती हैं तो गठबंधन की शर्तें क्या होंगी और दोनों के बीच सीटों का बंटवारा किस अनुपात में होगा, इसे लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
सीट बंटवारे पर भी हो सकती है बड़ी चर्चा
पंजाब में चुनाव नजदीक आते ही अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन की चर्चा अक्सर सामने आती रही है। अब एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा किस तरह होगा। अकाली दल की पुरानी स्थिति रही है कि भाजपा के साथ गठबंधन में वह बड़ी हिस्सेदारी चाहता रहा है। ऐसे में संभावित गठबंधन की स्थिति में सीटों की संख्या और हिस्सेदारी सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है।
किसान आंदोलन के दौरान टूटा था गठबंधन
अकाली दल और भाजपा के बीच लंबे समय तक राजनीतिक गठबंधन रहा है। हालांकि किसान आंदोलन के दौरान दोनों पार्टियों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया था। कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था। इसी दौरान हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी दे दिया था। उस समय अकाली दल की ओर से कहा गया था कि जब तक पंजाब से जुड़े बड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक भाजपा के साथ दोबारा गठबंधन का सवाल नहीं है। इनमें बंदी सिखों की रिहाई, पंजाब की राजधानी से जुड़े मुद्दे और पंजाबी भाषी क्षेत्रों से संबंधित मामले प्रमुख रहे हैं। ऐसे में अगर दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ती है तो इन मुद्दों पर सहमति बनती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
सुखबीर बादल की बैठक पर सबकी नजर
सेक्टर-9 स्थित सुखबीर सिंह बादल के आवास पर होने वाली बैठक में पार्टी के सांसदों के अलावा पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और विधानसभा क्षेत्र प्रभारी भी शामिल होंगे। बैठक में आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। सबसे बड़ा मुद्दा यही होगा कि अकाली दल आगामी चुनाव अकेले लड़ता है या भाजपा के साथ दोबारा राजनीतिक साझेदारी की ओर कदम बढ़ाता है। फिलहाल अकाली दल की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुखबीर बादल की मुलाकात और उसके तुरंत बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाए जाने से पंजाब की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें जरूर तेज हो गई हैं।