पंजाब में अब स्कूली बच्चों के कंधों पर नहीं होगा बोझ, भारी-भरकम बैग पर सख्त निर्देश जारी

Edited By Urmila,Updated: 04 Mar, 2026 10:21 AM

strict instructions issued on heavy bags

स्कूल जाने वाले नन्हे-मुन्नों के कंधों पर लटकते भारी-भरकम बैगों को लेकर अक्सर अभिभावकों और विशेषज्ञों द्वारा चिंता जताई जाती रही है।

लुधियाना (विक्की): स्कूल जाने वाले नन्हे-मुन्नों के कंधों पर लटकते भारी-भरकम बैगों को लेकर अक्सर अभिभावकों और विशेषज्ञों द्वारा चिंता जताई जाती रही है लेकिन अब विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है।

स्टेट कौंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.) पंजाब ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनकी सेहत को प्राथमिकता देते हुए स्कूल बैग का भार कम करने के संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि देखने में तो यह सिर्फ कागजी आदेश ही लग रहे हैं क्योंकि इनको लागू करवाने के लिए विभाग कोई कदम नहीं उठाता सिर्फ आदेश जारी करने की औपचारिकता निभाता है। यही वजह है कि भारी-भरकम बस्ते उठाकर बच्चे पीठ दर्द के शिकार हो रहे हैं। सरकार और विभाग की नालायकी के चलते बच्चों की पीठ पर पढ़ाई का बोझ और निजी स्कूलों व पब्लिशर्स की जेब भारी होती होती जा रही है।

ताजा जारी आदेशों में विभाग का मानना है कि बस्तों का अनावश्यक बोझ बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है जिससे उन्हें कम उम्र में ही पीठ, कंधे और मांसपेशियों में दर्द जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों के सरकारी, एडेड और प्राइवेट स्कूलों में इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

अब देखना यह है कि डी.ई.ओ. इन आदेशों को प्राइवेट स्कूलों में लागू करवाने के लिए किस हद तक कामयाब होते हैं क्योंकि विभाग की बात को तो स्कूल साइडलाइन करने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। यही वजह है कि शिक्षा विभाग पिछले लम्बे समय से किसी भी स्कूल पर कोई एक्शन नहीं ले पाया है केवल नोटिस जारी करने की ही खानापूर्ति की जा रही है। जिसका खामियाजा पेरैंट्स को पहले महंगी बुक्स खरीदकर और बाद में डॉक्टर की मोटी फीस भरकर भुगतना पड़ रहा है।

टीचिंग-लर्निंग प्रोसैस को बनाया जाएगा तनावमुक्त

विभाग ने विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया (टीचिंग-लर्निंग प्रोसैस) को और अधिक सरल और रोचक बनाने के लिए स्कूलों को विशेष कदम उठाने को कहा है जिसके अनुसार स्कूल की मॉर्निंग असैंबली में भारी बस्तों के नुकसान के बारे में जानकारी सांझा की जाएगी। विद्यार्थियों को प्रेरित किया जाएगा कि वे केवल टाइम-टेबल के अनुसार ही किताबें और नोट-बुक्स ही लाएं। अध्यापक महीने में कम से कम एक बार बस्तों का निरीक्षण करेंगे ताकि कोई फालतू सामग्री न हो। स्कूलों में अलमारी या रैक की व्यवस्था की जाएगी ताकि विद्यार्थी कुछ किताबें स्कूल में ही रख सकें।

क्लास-वाइज निर्धारित वजन सीमा

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अनुसार विद्यार्थी के बस्ते का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार क्लास-वाइज सिफारिशी सीमा इस प्रकार है।

कक्षा औसत शरीर का वजन (कि.ग्रा.) बैग का भार

प्री-प्राइमरी 10-16 कोई बस्ता नहीं
पहली 16-22 1.6-2.2 कि.ग्रा.
दूसरी 16-22 1.6-2.2 कि.ग्रा.
तीसरी 17-25 1.7-2.5 कि.ग्रा.
चौथी 17-25 1.7-2.5 कि.ग्रा.
5वीं 17-25 1.7-2.5 कि.ग्रा.
छठी 20-30 2.0-3.0 कि.ग्रा.
7वीं 20-30 2.0-3.0 कि.ग्रा.
8वीं 25-40 2.5-4.0 कि.ग्रा.
9वीं 25-45 2.5-4.5 कि.ग्रा.
10वीं 25-45 2.5-4.5 कि.ग्रा.
11वीं 35-50 3.5-5.0 कि.ग्रा.
12वीं 35-50 3.5-5.0 कि.ग्रा.

सी.बी.एस.ई.-एन.सी.ई.आर.टी. के अनुसार बैग वजन सीमा

सी.बी.एस.ई. और एन.सी.ई.आर.टी. के नियमों के तहत बैग की वजन सीमा निम्नलिखित निर्धारित की गई है।

कक्षा औसत शरीर का वजन (कि.ग्रा.) बस्ते के भार की सीमा

प्री-प्राइमरी: बैग पूरी तरह बंद
कक्षा 1-2: 1.6 से 2.2 किलो
कक्षा 3-5: 1.7 से 2.5 किलो
कक्षा 6-7: 2 से 3 किलो
कक्षा 8: 2.5 से 4 किलो
कक्षा 9-10: 2.5 से 4.5 किलो
कक्षा 11-12: 3.5 से 5 किलो

पी.जी.आई. की स्टडी में बड़ा खुलासा : 80% प्राइवेट स्कूली बच्चों का बैग था भारी

पिछले दिनों चंडीगढ़ के दो स्कूलों के 760 बच्चों पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि गवर्नमैंट स्कूलों के 69.7% और प्राइवेट स्कूलों के 80.2% बच्चे तय सीमा से अधिक वजन का बैग ला रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार, भारी बैग वाले बच्चों में कमर, कंधे और गर्दन दर्द की शिकायत 5 गुना ज्यादा देखी गई। हालांकि अच्छी बात यह रही कि जागरूकता और आदतों में बदलाव लाने से केवल एक महीने में औसत बैग का वजन 4.5 कि.ग्रा.से घटकर 3.2 कि.ग्रा. रह गया।

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