पानी-पानी हुआ Punjab, लोगों की दर्दभरी दास्तां रूला देगी, 15 दिन बाद भी...

Edited By Vatika,Updated: 08 Sep, 2025 02:17 PM

punjab flood panic situation

कई दिनों से हो रही भारी बारिश और विभिन्न बांधों से अत्यधिक पानी छोड़े जाने के कारण पंजाब

पंजाब डेस्कः कई दिनों से हो रही भारी बारिश और विभिन्न बांधों से अत्यधिक पानी छोड़े जाने के कारण पंजाब का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। जिसके कारण खास करके माझा क्षेत्र के किसानों और आम लोगों को काफी नुक्सान उठाना पड़ रहा है। 

कुछ ऐसे हुआ रूपनगर (रोपड़) जिले के गांव जिंदबड़ी के रहने वाले लोगों के साथ, जो भाखड़ा डैम से छोड़े गए पानी की वजह से बेघरों जैसी जिंदगी जी रहे हैं। लोगों का कहना है कि जैसे सूचना मिली कि भाखड़ा डैम से पानी छोड़ा जाएगा, तो हम तुरंत सर्तक हो गए, ऐसा ही हुआ आधी रात को हमारे घर पानी पहुंच गया। सामान तैरने लगा, पानी बहुत मिट्टी वाला था, जिसमें कई चीजें आ रही थीं। ऐसे में तुरंत हम बच्चों को साथ लेकर घर छोड़ भाग निकले। अब 15 दिन बाद भी हालात ये हैं कि घर के सामने सड़क के साथ से 3 से 4 फुट पानी बह रहा है। पूरी रात जागकर काट रहे हैं, घरों के लोग डिप्रेशन में चले गए है, जिंदगी नरक सी बन गई हैं। सरकार को तुरंत मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि ये हालात 1988 के बाद ऐसे बने हैं जो कि बेहद भयंकर है। 

कैबिनेट मंत्री बैंस ने खुद संभाली कमान
उधर, श्री कीरतपुर साहिब के विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा गुरदित्त्ता जी की प्राचीन ड्योढ़ी के पास भारी बारिश के कारण बड़ी दरार पड़ गई थी और साथ ही पहाड़ का हिस्सा धंस गया था, जिससे ड्योढ़ी को नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया था। इस स्थिति में इलाके भर के नौजवानों ने ड्योढ़ी को बचाने के लिए सेवा शुरू की। बड़ी संख्या में नौजवान मिट्टी से भरी बोरियां ट्रैक्टर-ट्रॉली में डालकर गुरुद्वारा साहिब तक पहुंचा रहे हैं। इसी सेवा में कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी स्वयं भाग लिया। मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की प्राचीन ड्योढ़ी को बचाने के लिए नौजवानों में भारी जोश है, जिसके चलते सैकड़ों की संख्या में युवा सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक आपदा हमारे ऊपर आई है, लेकिन जिस प्रकार नौजवानों ने उत्साह और एकजुटता का परिचय दिया है, वह अत्यंत सराहनीय है। खासतौर पर रूपनगर जिले के नौजवान जहां दरियाओं के बांधों पर नजर आए और टूटते बांधों को रोकने में जुटे, वहीं नहरों में आई टूट-फूट को भी रोकने के लिए आगे आए।

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