सस्पेंड DIG हरचरण सिंह भुल्लर को बड़ा झटका, High Court ने खारिज की याचिका

Edited By Kamini,Updated: 16 Feb, 2026 02:15 PM

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पंजाब पुलिस के सस्पेंड DIG हरचरण सिंह भुल्लर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

पंजाब डेस्क : पंजाब पुलिस के सस्पेंड DIG हरचरण सिंह भुल्लर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। भुल्लर को भ्रष्टाचार मामले में बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सोमवार को उनकी दायर जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके चलते हरचरण सिंह भुल्लर अभी जेल में ही रहेंगे। 

इससे पहले उनकी जमानत अर्जी ट्रायल कोर्ट और चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा भी खारिज की जा चुकी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भुल्लर ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि सीबीआई ने जिस शब्द “सेवा पानी” को कथित तौर पर रिश्वत की मांग से जोड़कर पेश किया है, उसका अर्थ अलग संदर्भ में भी हो सकता है। बचाव पक्ष का कहना था कि बातचीत में इस्तेमाल किया गया यह शब्द जरूरी नहीं कि अवैध लेन-देन के लिए ही प्रयुक्त हुआ हो। वकील ने अदालत से कहा कि केवल एक शब्द के आधार पर रिश्वत की मंशा साबित नहीं की जा सकती और पूरे घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

भुल्लर ने रेगुलर बेल के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, क्योंकि ट्रायल कोर्ट और चंडीगढ़ की स्पेशल CBI कोर्ट दोनों ने उसकी एप्लीकेशन पहले ही खारिज कर दी थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उसे राहत देने से मना कर दिया। एक डिटेल्ड ऑर्डर का इंतज़ार है, हालांकि सूत्रों ने बताया कि सुनवाई के दौरान यह चिंता जताई गई थी कि आरोपी, अपनी सीनियर पोजीशन और असर को देखते हुए, अगर बेल पर रिहा होता है तो गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि इससे पहले चंडीगढ़ की विशेष CBI कोर्ट ने भी भुल्लर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया था कि हरचरण सिंह भुल्लर जैसे वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी बिना पुख्ता सबूतों के संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी उच्च पद पर तैनात रहे हैं और प्रभावशाली परिवार से संबंध रखते हैं, इसलिए जांच एजेंसी ने ठोस सबूत एकत्र करने के बाद ही कार्रवाई की।

सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि पूर्व DIG भुल्लर के खिलाफ दर्ज मामला नॉन-बेलेबल श्रेणी का है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। उन्होंने दलील दी कि भुल्लर पुलिस विभाग में एक उच्च पद पर तैनात रहे हैं, ऐसे में मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सीबीआई पक्ष ने बचाव पक्ष के उस तर्क का भी जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। इस दौरान स्पष्ट किया कि इंस्पेक्टर आर.एम. शर्मा और इंस्पेक्टर पवन लांबा इस केस में गवाह हैं। कोर्ट को बताया गया कि पहले गवाह पवन लांबा और दूसरे गवाह आर.एम. शर्मा हैं, जिनके बयान केस का अहम हिस्सा हैं।

बता दें कि, पूर्व DIG हचरण सिंह भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को CBI ने मोहाली स्थित उनके कार्यालय से गिरफ्तार किया था। इससे पहले जांच एजेंसी ने कथित बिचौलिए कृष्णु को हिरासत में लिया था। उसके बाद भुल्लर की गिरफ्तारी की गई। सीबीआई ने उन पर पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई की थी। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने उनके आवास पर छापेमारी की, जहां से करीब 7 करोड़ 50 लाख रुपये नकद, कई महंगी घड़ियां, शराब की बोतलें और लग्जरी गाड़ियों की चाबियां बरामद होने की बात सामने आई थी। मामले में आगे की जांच जारी है। फिलहाल 59 वर्षीय भुल्लर मॉडल जेल, चंडीगढ़ में बंद हैं।

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