Edited By Subhash Kapoor,Updated: 01 Apr, 2026 12:13 AM

देश भर में एल.पी.जी. गैस की कमी का असर अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी देखने को मिल रहा है। मोगा जिले के कई स्कूलों में गैस सिलैंडर समय पर उपलब्ध न होने के कारण बच्चों के लिए मिड-डे मील पारंपरिक लकड़ी जलाकर चलने वाले चूल्हों पर तैयार किया जा रहा...
मोगा (गोपी, कशिश) : देश भर में एल.पी.जी. गैस की कमी का असर अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी देखने को मिल रहा है। मोगा जिले के कई स्कूलों में गैस सिलैंडर समय पर उपलब्ध न होने के कारण बच्चों के लिए मिड-डे मील पारंपरिक लकड़ी जलाकर चलने वाले चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल स्कूल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं बल्कि संसाधनों और खर्च पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
मोगा जिले में कुल 606 स्कूल हैं जिनमें 354 प्राइमरी, 237 अपर प्राइमरी, 10 सरकारी सहायता प्राप्त, 3 आदर्श स्कूल और 2 अन्य स्कूल शामिल हैं। इन सभी में करीब 65 हजार बच्चों को प्रतिदिन मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, हाल ही में कई स्कूलों में गैस की कमी के चलते भोजन व्यवस्था प्रभावित होती नजर आई। ग्राऊंड स्तर पर जांच के दौरान सामने आया कि सरकारी प्राइमरी स्कूल जलालाबाद पूर्वी में करीब 450 बच्चों के लिए मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी से खाना बनाया जा रहा है।
वहीं, सरकारी प्राइमरी स्मार्ट स्कूल गार्डन कॉलोनी में 187 बच्चों के लिए भी इसी तरह भोजन तैयार किया जा रहा है। स्कूलों में रसोइयों को धुएं और अतिरिक्त मेहनत के बीच काम करना पड़ रहा है। गार्डन कॉलोनी स्कूल के प्रिं. गुरमीत सिंह सोढी ने बताया कि गैस सिलैंडर समय पर नहीं मिल पाता जिसके कारण कई बार शिक्षकों को अपने घरों से सिलैंडर लाना पड़ता है या गांव से इंतजाम करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मजबूरी में चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, जलालाबाद पूर्वी स्कूल की प्रिं. प्रभदीप कौर ने बताया कि उनके स्कूल का गैस सिलैंडर कुछ समय पहले चोरी हो गया था और अब गैस की कमी के कारण नया सिलैंडर नहीं मिल पा रहा। उन्होंने बताया कि रोजाना 8 से 10 क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है, जिसकी कीमत करीब 900 रुपए प्रति क्विंटल है। इसके बावजूद बच्चों को समय पर भोजन देना प्राथमिकता है।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्राइमरी) मंजू भारद्वाज ने कहा कि कुछ स्कूलों में गैस की कमी की समस्या आई है। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर द्वारा एक कमेटी गठित की गई है ताकि आपूर्ति सुचारू रखी जा सके। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए थे कि स्कूल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें जिससे बच्चों के भोजन में बाधा न आए।