2027 के चुनाव से पहले राजनीति में नया मोड़, BJP को मिला नया चेहरा

Edited By Sunita sarangal,Updated: 11 May, 2026 02:40 PM

young leader advocate amit agarwal joins bjp in baghapurana

जो पार्टियां अब तक इस इलाके में खुद को मजबूत मान रही थीं, वे भी इस नए चेहरे के मैदान में आने के बाद अपनी रणनीति पर फिर से सोचने पर मजबूर हो गई हैं।

बाघापुराना(अंकुश) : बाघापुराना विधानसभा इलाके में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब जाने-माने समाजसेवी और युवा नेता एडवोकेट अमित अग्रवाल ने भाजपा की कमान संभाली। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अग्रवाल के आने से बाघापुराना का राजनीतिक खेल काफी हद तक बदल सकता है। जो पार्टियां अब तक इस इलाके में खुद को मजबूत मान रही थीं, वे भी इस नए चेहरे के मैदान में आने के बाद अपनी रणनीति पर फिर से सोचने पर मजबूर हो गई हैं।

यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है, खासकर 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए। एडवोकेट अमित अग्रवाल लंबे समय से समाजसेवा से जुड़े हैं और लोगों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना चुके हैं। इस वजह से वह न सिर्फ बाघापुराना विधानसभा क्षेत्र में बल्कि पूरे मोगा जिले में एक जाना-माना चेहरा बन गए हैं। लोकल लेवल पर यह भी चर्चा है कि अगर भाजपा अग्रवाल को 2027 के चुनाव में उतारती है, तो किसी भी पार्टी के लिए उनसे जीतना आसान नहीं होगा।

खास बात यह है कि अग्रवाल कम्युनिटी के साथ-साथ उन्हें हिंदू कम्युनिटी का भी भारी सपोर्ट मिल रहा है। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद विधानसभा क्षेत्र में बधाई देने वालों का तांता लग गया है। शहर और आसपास के इलाकों में यह भी चर्चा है कि अग्रवाल अपने मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव की वजह से विधानसभा क्षेत्र की अलग-अलग लीडरशिप को एक साथ ला सकते हैं। अगर वह ऐसा करने में कामयाब हो जाते हैं, तो भाजपा के लिए बाघापुराना सीट जीतना मुमकिन हो सकता है।

उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य बाघापुराना को विकास के मामले में राज्य का सबसे आगे वाला चुनाव क्षेत्र बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ वायदे करने में विश्वास नहीं रखते बल्कि जो कहते हैं, उसे पूरा भी करते हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि एडवोकेट अमित अग्रवाल के भाजपा में आने से बाघापुराना की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह राजनीतिक समीकरण क्या रुख अपनाता है और 2027 के चुनावों में इसका क्या असर पड़ता है।

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