पंजाब में प्रीपेड मीटर ने खड़ा किया बड़ा संकट, कई स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में बिजली गुल

Edited By Kamini,Updated: 09 May, 2026 12:14 PM

prepaid meters trigger major crisis in punjab

पंजाब भर में लगाए जा रहे बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का विरोध अब असल रूप में सामने आना शुरू हो गया है।

गुरदासपुर (हरमन): पंजाब भर में लगाए जा रहे बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का विरोध अब असल रूप में सामने आना शुरू हो गया है। गुरदासपुर समेत पंजाब के कई इलाकों में सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में लगे प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की सप्लाई अचानक बंद होने से हड़कंप मच गया। गर्मी के मौसम में कई स्कूलों की बिजली गुल हो जाने से विद्यार्थियों, अध्यापकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत हरकत में आते हुए इस संबंध में जरूरी बजट भी जारी कर दिया है, लेकिन फिलहाल इस सिस्टम ने एक बार सभी की सांसें फुला दीं।

मिली जानकारी के अनुसार, पावरकॉम द्वारा पिछले काफी समय से सरकारी संस्थानों और आम उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे थे। हालांकि किसान संगठनों और कई अन्य संस्थाओं द्वारा इस योजना का कड़ा विरोध भी किया गया था, लेकिन सरकार और पावरकॉम ने यह प्रक्रिया जारी रखी। अब ज्यादातर सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में ये मीटर लग चुके हैं और उन्हें ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया गया है।

पता चला है कि पावरकॉम द्वारा चुपचाप ये मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड प्रणाली में तब्दील कर दिए गए हैं। इसके बाद विभिन्न स्कूल प्रमुखों और विभागों के अधिकारियों को मोबाइल फोन पर लगातार मैसेज आ रहे थे कि वे तुरंत अपने मीटरों का अग्रिम भुगतान (एडवांस पेमैंट) करें, अन्यथा बिजली सप्लाई बंद कर दी जाएगी। कई स्कूल प्रमुखों ने पहले इन मैसेज को सामान्य नोटिफिकेशन समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन जब अचानक बिजली सप्लाई बंद हुई तो मामला गंभीर बन गया।

गुरदासपुर शहर के कई सरकारी स्कूलों में आज बिजली सप्लाई बंद रही। पहले अध्यापकों ने मीटर की खराबी समझकर इलेक्ट्रिशियन बुलाए, लेकिन जांच के दौरान मीटर ठीक पाए गए। बाद में पावरकॉम से पता चला कि मीटरों की प्रीपेड राशि खत्म होने के कारण सप्लाई ऑटोमैटिक तौर पर बंद हो गई है। सबसे बड़ी समस्या यह बन गई है कि सरकारी विभागों के पास अग्रिम भुगतान करने के लिए कोई स्पष्ट प्रणाली मौजूद नहीं है। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में बिल आने के बाद ही उसका भुगतान किया जाता है। लेकिन अब प्रीपेड प्रणाली लागू होने से क्लर्कों और अकाउंट शाखाओं में भारी उलझन पैदा हो गई है कि बिना बिल के किस खाते के माध्यम से अग्रिम राशि जमा करवाई जाए। इस कारण न केवल अध्यापक और स्कूल प्रमुख परेशान हो रहे हैं, बल्कि सरकारी दफ्तरों में भी हड़बड़ाहट का माहौल बना हुआ है। गर्मी के दिनों में बिजली बंद होने के कारण कई स्कूलों में पढ़ाई का काम भी प्रभावित हुआ।

क्या कहना है जिला शिक्षा अधिकारी का

इस संबंध में जब जिला शिक्षा अधिकारी परमजीत सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल में विद्यार्थियों या अध्यापकों को समस्या नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मामला अभी उनके संज्ञान में आया था और इसका तुरंत स्थायी समाधान करने के लिए सभी स्कूलों से जानकारी एकत्रित कर वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है। उन्होंने बताया कि गुरदासपुर जिले को आवश्यक बजट आवंटित हो गया है जो एक दिन में ही सभी ब्लॉकों को बांट दिया जाएगा, ताकि संबंधित ब्लॉक अपने अधीन आने वाले विभिन्न स्कूलों के बिजली बिल समय पर जमा करवाकर बिजली की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा कि सारा सिस्टम जल्द ही सामान्य हो जाएगा।

क्या कहना है पावरकॉम अधिकारियों का

गुरदासपुर के एक्सीयन कुलदीप सिंह और शहरी सब डिवीजन के एस.डी.ओ. भूपिंदर सिंह कलेर ने कहा कि यह पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक है और किसी भी मीटर की सप्लाई निजी तौर पर बंद नहीं की गई है। बिलिंग साइकिल के मुताबिक जब प्रीपेड राशि खत्म होती है तो सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है और राशि जमा होने पर दोबारा चालू भी हो जाती है। सरकार के निर्देशों के अनुसार लगभग सभी सरकारी संस्थानों में ये स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध बिजली सप्लाई देना है।

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