Edited By Kalash,Updated: 15 Jul, 2026 02:12 PM

पंजाब कांग्रेस में प्रधानगी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच दिल्ली में सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है।
चंडीगढ़ (अंकुर तांगड़ी): पंजाब कांग्रेस में प्रधानगी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच दिल्ली में सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस हाईकमान द्वारा लगातार मीटिंगों का दौर जारी है और पंजाब के सीनियर नेताओं की दिल्ली आवाजादी ने अटकलों को और हवा दे दी है। इस बीच पंजाब कांग्रेस इंचार्ज भूपेश बघेल ने प्रधानगी में बदलाव की चर्चाओं पर दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि "जो होना था वो हो गया, प्रधान बदलना कोई गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं है।" बुधवार को कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी के. सी. वेणुगोपाल के निवास पर अहम बैठक हुई जिसमें भूपेश बघेल भी शामिल हुए। बैठक के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी को लेकर कोई नया फैसला हो सकता है या हाईकमान किसी और फॉर्मूले पर विचार कर रहा है, तो बघेल ने साफ शब्दों में कहा कि जो फैसला लिया जाना था वह पहले ही लिया जा चुका है और अब किसी तरह का बदलाव नहीं होने जा रहा।
भूपेश बघेल के इस बयान को पंजाब कांग्रेस में चल रही सभी अटकलों पर बड़ा विराम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा थी कि हाईकमान पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी को लेकर फिर विचार कर सकती है पर बघेल ने साफ कर दिया कि पार्टी अपने पहले के फैसले पर कायम है। दूसरी तरफ दिल्ली में पंजाब को लेकर मंथन का दौर जारी है। इससे पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस प्रधान मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर पंजाब की स्थिति पर चर्चा की थी। इसके बाद के. सी. वेणुगोपाल से भी विचार-चर्चा हुई और अब उनके निवास पर हुई बैठक ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। इस दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को भी दिल्ली बुलाया गया। जानकारी के मुताबिक वह वेणुगोपाल के निवास पर हुई मीटिंग में शामिल हुए। उनका यह अचानक दिल्ली दौरा भी काफी चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने मीडिया से कोई बात नहीं की। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने सिर्फ यह कहा कि बाद में बात करेंगे और आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनकी इस चुप्पी ने भी कई नए सवाल खड़े कर दिए। अब नजरें इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले समय में प्रताप सिंह बाजवा की कांग्रेस प्रधान मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात होती है या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि दिल्ली में जारी बैठकों के बाद पंजाब कांग्रेस को लेकर कोई संगठनात्मक फैसला सामने आता है या नहीं। फिलहाल भूपेश बघेल का संदेश बिलकुल साफ है कि, "जो होना था वो हो गया, प्रधान बदलना कोई गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं।" इसके बावजूद भी दिल्ली में लगातार जारी बैठकों और सीनियर नेताओं की मुलाकातों के कारण सस्पेंस अभी भी बरकरार है।
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