लुधियाना का प्रदूषण जांच केंद्र फिर विवादों में, लगे गंभीर आरोप

Edited By Kamini,Updated: 11 Jun, 2026 07:51 PM

ludhiana s pollution testing center mired in controversy

लुधियाना-जालंधर बाईपास स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप परिसर में संचालित प्रदूषण जांच केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है।

लुधियाना (गणेश/अशोक/सचिन): लुधियाना-जालंधर बाईपास स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप परिसर में संचालित प्रदूषण जांच केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। केंद्र पर वाहन चालकों से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूलने के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता विनय वर्मा ने आरोप लगाया कि उनसे प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) बनवाने के नाम पर 500 रुपये की मांग की गई।

विनय वर्मा के अनुसार केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि 100 रुपये प्रदूषण प्रमाणपत्र शुल्क है, जबकि 400 रुपये वाहन नंबर को सिस्टम में जोड़ने (एनएल लिंक) और नंबर प्लेट लिंक करने के नाम पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके सामने मौजूद 2 अन्य वाहन चालकों से भी इसी प्रकार 500-500 रुपये वसूले गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने अतिरिक्त 400 रुपये के संबंध में कोई रसीद अथवा लिखित प्रमाण मांगा तो कर्मचारियों ने कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। उनका कहना है कि केंद्र पर मौजूद कुछ कर्मचारियों को प्रक्रिया संबंधी पूरी जानकारी भी नहीं थी।

मामले की पड़ताल के दौरान केंद्र के केबिन में मौजूद एक युवती ने कथित तौर पर बताया कि उसके वरिष्ठ कर्मचारी "स्वीटी" के निर्देशानुसार कुल 500 रुपये लिए जा रहे हैं, जिनमें 100 रुपये प्रदूषण जांच शुल्क तथा 400 रुपये एनएल लिंक के नाम पर शामिल हैं। जब अतिरिक्त राशि के संबंध में कोई लिखित प्रमाण मांगा गया तो कथित रूप से जवाब दिया गया कि यदि ग्राहक यह शुल्क नहीं देना चाहता तो वह अपना कार्य आरटीओ कार्यालय से करवा सकता है। शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में संबंधित कर्मचारी स्वीटी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। वहीं, पंजाब केसरी टीम द्वारा भी उनका पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क किया गया, परंतु समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हो सका।

इस संबंध में जब पेट्रोल पंप के मैनेजर से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण जांच केंद्र पेट्रोल पंप प्रबंधन के सीधे नियंत्रण में नहीं आता, बल्कि टेंडर प्रक्रिया के तहत संचालित किया जाता है और शुल्क संबंधी निर्णय संबंधित संचालकों द्वारा लिए जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंजाब एग्रो के पूर्व परिसर में संचालित इस प्रदूषण केंद्र पर लंबे समय से यह कथित खेल जारी है।

लोगों का कहना है कि शहर में कई अन्य प्रदूषण जांच केंद्रों पर भी निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। आरोप है कि अतिरिक्त राशि के बदले न तो कोई वैध रसीद दी जाती है और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराया जाता है। फिलहाल शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रदूषण प्रमाणपत्र निर्धारित नियमों के अनुसार जारी किए जाने तथा कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की अपील की है।

क्या है निर्धारित शुल्क?

जानकारों के अनुसार कारों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) का शुल्क वाहन के ईंधन प्रकार के अनुसार निर्धारित किया जाता है। सामान्यतः पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी वाहनों के लिए यह शुल्क 80 से 115 रुपये तथा डीजल वाहनों के लिए 100 से 130 रुपये तक होता है। निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की स्थिति में वाहन मालिक संबंधित आरटीओ अथवा परिवहन विभाग में शिकायत दर्ज करवा सकता है।

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