रसोई पर गैस संकट: घंटों कतारों में खड़े उपभोक्ता, बढ़ती परेशानी से जूझ रही जनता

Edited By Vatika,Updated: 24 Mar, 2026 09:30 AM

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खाड़ी देशों में जारी युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय तनाव का असर अब देश के आम उपभोक्ताओं

जालंधर(धवन): खाड़ी देशों में जारी युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय तनाव का असर अब देश के आम उपभोक्ताओं पर साफ दिखाई देने लगा है। रसोई गैस सिलैंडरों की किल्लत के चलते ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलैंडर खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जबकि कई स्थानों पर पर्याप्त सप्लाई न होने के कारण लोगों को खाली हाथ भी लौटना पड़ रहा है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से गैस की उपलब्धता पर असर पड़ा है और अब देश के कई हिस्सों में गैस सिलैंडरों की कमी महसूस की जा रही है। लोगों के अनुसार स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है, क्योंकि घरेलू जरूरतों के लिए गैस सिलैंडर सबसे अहम साधन है और इसके बिना रसोई चलाना कठिन हो गया है। ग्रामीण इलाकों में जहां वैकल्पिक साधन सीमित हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में बढ़ती मांग और कम आपूर्ति ने संकट को और बढ़ा दिया है। लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ गैस डीलर और एजैंसियां इस स्थिति का फायदा उठाकर सिलैंडरों की जमाखोरी कर रही हैं। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि ऐसे गैस डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो कृत्रिम कमी पैदा कर लोगों को परेशान कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन एजैंसियों के स्टॉक, बुकिंग और डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच करे तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। लोगों ने यह भी कहा कि सरकार को कालाबाजारी और जमाखोरी पर तुरंत रोक लगानी चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके। उपभोक्ताओं के मुताबिक अमरीका-इसराईल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अंतर्राष्ट्रीय पैट्रोलियम और गैस बाजार पर पड़ रहा है।

यही कारण है कि पैट्रोलियम पदार्थों और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक युद्ध समाप्त नहीं होता, तब तक कीमतों में राहत की उम्मीद भी कम नजर आ रही है। बढ़ती कीमतों और सप्लाई में कमी ने आम आदमी के बजट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि वे रोजाना गैस सिलैंडर लेने के लिए एजैंसियों के चक्कर काट रहे हैं। सुबह से लाइन में लगने के बावजूद कई बार उन्हें देर शाम तक इंतजार करना पड़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और मजदूर वर्ग के लिए यह परेशानी और भी अधिक है, क्योंकि घंटों कतार में खड़े रहना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है। लोगों का कहना है कि गैस जैसी बुनियादी जरूरत के लिए इस तरह संघर्ष करना बेहद चिंताजनक है। ग्रामीण क्षेत्रों से मिली शिकायतों के अनुसार वहां गैस की सप्लाई और भी अधिक प्रभावित है। कई गांवों में लोगों को समय पर सिलैंडर नहीं मिल रहे, जिसके चलते उन्हें लकड़ी, उपले या अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं शहरों में कामकाजी परिवारों और किराए पर रहने वाले लोगों के लिए गैस संकट ने दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। उपभोक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई व्यवस्था को तुरंत मजबूत किया जाए, जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और प्रत्येक उपभोक्ता तक समय पर गैस सिलैंडर पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट और गहरा सकता है तथा आम जनता का आक्रोश बढ़ सकता है।

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