जालंधर निगम फिर विवादों में, पहले से हुए काम पर नया टेंडर जारी

Edited By Urmila,Updated: 03 Jan, 2026 10:58 AM

jalandhar municipal corporation

जालंधर नगर निगम में पिछले दो सालों के दौरान बिना टैंडर और केवल सैंक्शन के आधार पर करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए जाने को लेकर उठे सवाल अब गंभीर रूप ले चुके हैं।

जालंधर (खुराना): जालंधर नगर निगम में पिछले दो सालों के दौरान बिना टैंडर और केवल सैंक्शन के आधार पर करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए जाने को लेकर उठे सवाल अब गंभीर रूप ले चुके हैं। इस संबंध में दर्जनों शिकायतें चंडीगढ़ तक पहुंच चुकी हैं, जिनमें मांग की गई है कि निगम सैंक्शन के आधार पर काम देना बंद करे और सभी विकास कार्य केवल पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही करवाए जाएं।

हालांकि अब यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि निगम द्वारा लगाए जा रहे टैंडरों में भी गड़बड़ियां की जा रही हैं। कुछ महीने पहले वैस्ट विधानसभा क्षेत्र के करीब एक दर्जन वार्डों के मेंटेनेंस कार्यों के टैंडर एक ही राशि के पाए गए थे, जिससे संकेत मिल रहा था कि इन्हें दफ्तर में ही बैठकर तैयार किया गया है। अब इसी वैस्ट क्षेत्र के टैंडरों में एक और बड़ा मामला उजागर हुआ है।

शिकायतकर्त्ता द्वारा निगम कमिश्नर, लोकल बॉडीज के उच्च अधिकारियों और चीफ विजिलेंस ऑफिसर को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वैस्ट हलके के हाल ही में जारी किए गए टैंडरों में भार्गव कैंप के निकट एक गली में सीवर लाइन डालने के काम का क़रीब 40 लाख रुपए का टैंडर शामिल किया गया है, जबकि हकीकत यह है कि उस गली में सीवर लाइन पहले ही डाली जा चुकी है।

अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि वहां पहले से सीवर लाइन पड़ी हुई है, तो वह किस टेंडर या किस कार्य के अंतर्गत डाली गई थी और फिर उसी काम का टैंडर दोबारा क्यों लगाया गया? बताया जा रहा है कि निगम ने इस टैंडर की टेक्निकल बिड खोल दी है और जल्द ही फाइनेंशियल बिड खोलकर इसे अलॉट करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इस स्थिति को देखते हुए शिकायतकर्ता ने मांग की है कि फिलहाल इस टैंडर पर स्टे लगाया जाए और जांच पूरी होने तक इसे अलॉट न किया जाए। साथ ही यदि जांच के दौरान गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित निगम अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

फर्जी कोटेशन, सुपर सक्शन और सैंक्शन कार्यों से जुड़ी शिकायतों पर सरकार सख्त

 जल्द निगम आ सकते हैं चीफ विजिलेंस ऑफिसर

आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है, जिसके चलते लोकल बॉडीज संस्थानों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल के दिनों में बटाला नगर निगम तथा अमृतसर इंप्रूवमैंट ट्रस्ट में भ्रष्टाचार संबंधी मामलों पर कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। इससे पहले भी पंजाब के कई नगर निगमों पर शिकंजा कसा जा चुका है।

जालंधर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार से जुड़ी कई शिकायतें पिछले समय से सरकार और विभागीय अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं, जिनमें से कई मामलों की जांच जारी है। ज्यादातर शिकायतें सैंक्शन के माध्यम से करवाए गए कामों से संबंधित हैं, जहां फर्जी कोटेशन लेने, जाली बिल तैयार करने और चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

सुपर सक्शन से संबंधित काम भी जांच के घेरे में हैं, जहां लाखों रुपये के काम बिना टेंडर के करवाए जाने की बात सामने आई है। ऐसी शिकायतें लोकल बॉडीज के चीफ विजिलेंस ऑफिसर तक पहुंच चुकी हैं। माना जा रहा है कि इन शिकायतों की जांच हेतु चीफ विजिलेंस ऑफिसर आगामी सप्ताह जालंधर निगम का दौरा कर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर सकते हैं।

इस बीच अत्यंत विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारी जांच से पहले गड़बड़ी से संबंधित फाइलों को गायब करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हालांकि निगम के मेयर और कमिश्नर ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में जालंधर नगर निगम की कौन-कौन सी गड़बड़ियां जांच के दायरे में आती हैं और इन मामलों में क्या कार्रवाई होती है।

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