नगर निगम चुनाव: भाजपा के कई पूर्व पार्षद, जिला, प्रदेश पदाधिकारी दबाव में

Edited By Sunita sarangal,Updated: 03 Dec, 2023 10:27 AM

bjp workers in pressure

वहीं पिछले दिनों प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सभी जिला और प्रदेश पदाधिकारियों को आगामी स्थानीय चुनावों...

जालंधर: स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणाओं में अनिश्चितता और भाजपा संगठन विस्तार के नाम पर चलने वाली लम्बी बैठकों से भाजपा कार्यकर्ता व पदाधिकारी ऊबने लगे हैं। अभी अधिकतर मंडल व शक्ति केन्द्रों का पूर्ण विस्तार हुआ नहीं है, अब पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति के आदेश से वर्तमान जिला पदाधिकारियों की सांसें फूलने लगी है। दूसरा जिला स्तर पर संभावित रद्दोबदल के चलते कई पदाधिकारी अपनी पदोन्नति के लिए हाथ पैर मार रहे हैं तो कई अपना पद बचाने के लिए अपने-अपने आकाओं की शरण में हैं।

वहीं पिछले दिनों प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सभी जिला और प्रदेश पदाधिकारियों को आगामी स्थानीय चुनावों के लिए तैयार रहने के लिए कहे जाने के मौखिक निर्देश दिए जाने से कई पूर्व पार्षद, जिला, प्रदेश पदाधिकारी भी दबाब में हैं। मना कर नहीं सकते, चुनाव लड़ने पर हारने का डर भी कायम है। इसी चक्कर में कई पदाधिकारी पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं।

बिना नंबर आवेदन फार्म क्यों !

भाजपा द्वारा नगर निगम चुनाव लड़ने के इच्छुकों को क्षेत्र विशेष के मंडल अध्यक्ष से आवेदन पत्र लेकर भरने को कहा गया है। हर कार्य में पारदर्शिता रखने का दावा करने वाली भाजपा द्वारा बिना किसी नंबर के आवेदन पत्र जारी करना कार्यकर्ताओं को काफी सन्देहास्पद लग रहा है। इस मामले में कोई भी नेता कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर प्रदेश पदाधिकारियों के लाडले महासचिव ने कहा कि आवेदन पत्र के साथ जमा की जाने वाली राशि निकट भविष्य में प्रार्थी (जनरल) के लिए 3000 की बजाय 5000 रुपए, अनुसूचित वर्ग के लिए यह राशि 1000 की बजाय 3000 रुपए की जा सकती है।

फोन नहीं उठाते भाजपा पदाधिकारी

जिला पदाधिकारियों द्वारा नगर निगम के चुनावों के लिए भावी उम्मीदवारों को फोन करके अपने आवेदन देने के लिए कहा जा रहा है। पूरी जोर अजमाइश के बावजूद अभी भी कई वार्डों का खाता भी नहीं खुला हैं। एक भड़के हुए नेता ने कहा कि भाजपा अपने सक्रिय कार्यकर्ताओं से लगातार दूर होते जा रहा है। यदि किसी कार्यकर्ता पर कोई मुश्किल आ जाए तो अधिकतर नेता फोन ही नहीं उठाते, गलती से कोई फोन मिल भी जाए तो मीटिंग में हूं, फ्री होकर फोन करता हूं, उसके बाद न कोई बहाना, न ही फोन उठाना का नियम लागू है।

प्रदेश व जिला अधिकारियों में बढ़ती दूरियों से कार्यकर्ता परेशान

सबसे बड़ी और अनुशासित पार्टी होने दम भरने वाली भाजपा विशेषकर जालंधर के पदाधिकारी आजकल परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं। गुटबाजी के साथ-साथ प्रदेश व जिला अधिकारियों में बढ़ती खींचतान और दूरियों से कार्यकर्ता परेशान होकर घरों में बैठना शुरू हो गए हैं जबकि गणेश परिक्रमा विशेषज्ञ कार्यकर्ता संगठन सक्रियता को लगातार कमजोर करते जा रहे हैं।

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