युगपुरुष स्वामी विवेकानंद को BJP ट्रेड विंग ने दी श्रद्धांजलि, स्मारक स्थल पर नतमस्तक हुए नेता

Edited By Kamini,Updated: 04 Jul, 2026 04:06 PM

bjp trade wing pays tribute to swami vivekananda

युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर आज उनके महानगर में स्मारक स्थल पर भारतीय जनता पार्टी ट्रेड विंग पंजाब के उपाध्यक्ष रविंद्र धीर अपने साथियों सहित नतमस्तक हुए और उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

जालंधर : युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर आज उनके महानगर में स्मारक स्थल पर भारतीय जनता पार्टी ट्रेड विंग पंजाब के उपाध्यक्ष रविंद्र धीर अपने साथियों सहित नतमस्तक हुए और उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविन्द्र धीर ने साथियों सहित उनके स्मारक स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उनके साथ बीजेपी नेता योगेश मलहोत्रा विपिन  प्रिंजा  राजिंदर चतरथ साहिल बेदी अजय वर्मा ऋषि बहल मनोज वढेरा एवं ग्रोवर जी उपस्थित रहे

युगपुरुष स्वामी विवेकानंद का झुकाव बचपन से ही अध्यात्म की ओर था। उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस देव से सीखा कि सभी जीवो में परमात्मा का अस्तित्व है। सनातन और हिंदू धर्म, हिंदू दर्शन के प्रसार हेतु उन्होंने सर्वप्रथम व्यापक रूप से भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा करने के बाद विश्व धर्म संसद में सन 1893 में संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतवर्ष का प्रतिनिधित्व किया। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ और सनातन के प्रचार प्रसार हेतु उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। 

इस अवसर पर भाजपा नेता रविन्द्र धीर ने कहा कि मध्य 25 वर्ष की आयु में परिवार को छोड़कर साधु बन कर उन्होंने अपना जीवन हिंदू दर्शन के लिए समर्पित कर दिया। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता। यह उनका महा वाक्य था। स्वामी विवेकानंद जी कहा करते थे पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है फिर विरोध होता है और फिर उसको स्वीकार कर लिया जाता है। खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। भारतीय अध्यात्म विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा ऐसा उनका मानना था। 

वहीं उनके बारे में गुरुदेव रविंद्र नाथ ठाकुर ने कहा था कि यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानंद को पढ़िए। अपने जीवन के अंतिम दिन उन्होंने कहा था कि एक और विवेकानंद चाहिए यह समझने के लिए कि इस विवेकानंद ने आज तक क्या किया। 4 जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में बेलूर मठ में उन्होंने महा समाधि ली।

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